प्रत्येक चार में से एक यूजर्स एप को देते हैं माइक और कैमरे की एक्सेस: रिपोर्ट

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Tue, 06 Apr 2021 04:43 PM IST
सार

प्रत्येक चार में से एक यूजर ने अपनी डिवाइस के माइक और वेबकैम का एक्सेस दिया है। कैस्परस्काई ने 15,000 लोगों के साथ हुए सर्वे के बाद रिपोर्ट जारी की है।

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Every 1 In 4 Online Users Allow Apps Access To Mic and Webcam says kaspersky Study
video call - फोटो : istock

    विस्तार

    कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज बड़े स्तर पर पूरी दुनिया में हुई हैं। इस दौरान लोगों ने अपने अधिकतर काम ऑनलाइन और वीडियो कॉलिंग के जरिए पूरे किए हैं। ऐसे में लोगों को वीडियो कॉलिंग एप्स को कैमरे और माइक का एक्सेस देना पड़ा है। साइबर सिक्योरिटी फर्म और एंटी वायरस बनाने वाली कंपनी कैस्परस्काई ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि प्रत्येक चार में से एक यूजर ने अपनी डिवाइस के माइक और वेबकैम का एक्सेस दिया है। कैस्परस्काई ने 15,000 लोगों के साथ हुए सर्वे के बाद रिपोर्ट जारी की है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे में शामिल अधिकतर लोग अपनी डिवाइस के वेबकैम को लेकर खुले होने को लेकर चिंतित हैं। सर्वे में शामिल 10 में से 6 लोगों ने कहा है कि उन्हें हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि कहीं कोई उनकी मर्जी के बिना वेबकैम से उनकी निगरानी तो नहीं कर रहा है।

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    सर्वे में शामिल 60 फीसदी लोगों ने कहा कि स्पाई सॉफ्टवेयर के जरिए ऐसा संभव है। एप्स को कैमरा और माइक का एक्सेस देने वाले अधिकतर यूजर 25 से 34 साल की आयु वाले हैं, जबकि 55 या इससे अधिक आयु वाले लोग कैमरा, माइक, गैलरी, कॉल आदि का एक्सेस नहीं देते हैं।

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    गौरतलब है कि हाल ही में ग्लांस ने भी मोबाइल इस्तेमाल को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि मुताबिक पिछले साल एक भारतीय ने लॉक स्क्रीन कंटेंट देखने में प्रतिदिन औसतन 25 मिनट बिताए हैं। ग्लांस की यह रिपोर्ट जनवरी 2020 से जनवरी 2021 तक यूजर के बिहेवियर को को लेकर तैयार की गई है।

    ग्लांस में अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोबाइल यूजर्स सबसे ज्यादा वीडियो कंटेंट देखते हैं। वीडियो कंटेंट का कंजप्शन 64 फीसदी है। वहीं आर्टिकल (टैक्स्ट और इमेज) की हिस्सेदारी 36 फीसदी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सस्ता इंटरनेट होने के कारण छोटे शहरों में वीडियो कंटेंट का कंजप्शन महानगरों के बराबर हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ, पुणे और पटना जैसे शहरों में हैदराबाद, बंगलूरू और कोलकाता की तुलना में अधिक वीडियो देखे जा रहे हैं।

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