{"_id":"6aa2bd6e241c56342009c76a","slug":"delhi-high-court-observed-that-wfi-should-frame-guidelines-to-balance-interest-of-nation-athlete-2026-09-10","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली उच्च न्यायालय का डब्ल्यूएफआई को निर्देश: विनेश की याचिका पर सुनाई के दौरान की अहम टिप्पणी, जानें मामला","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
दिल्ली उच्च न्यायालय का डब्ल्यूएफआई को निर्देश: विनेश की याचिका पर सुनाई के दौरान की अहम टिप्पणी, जानें मामला
Thu, 10 Sep 2026 07:53 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Thu, 10 Sep 2026 07:53 PM IST
सार
भारतीय पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने कहा कि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को देश और खिलाड़ी के हितों के बीच संतुलन कायम करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने चाहिए।
विज्ञापन
विनेश फोगाट
- फोटो : ANI
विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को देश और खिलाड़ी के हितों के बीच संतुलन कायम करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने चाहिए विशेषकर उस महिला खिलाड़ी के लिए जो मातृत्व के बाद दोबारा खेल के मैदान पर लौटती है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यह दुखद है कि महिलाओं को शादी और बच्चे के जन्म के बाद अपने करियर को पीछे रखना पड़ता है जबकि पुरुष अपने-अपने करियर में आगे बढ़ते रहते हैं।
विज्ञापन
विनेश ने चयन ट्रायल के लिए मांगी है अनुमति
अदालत ने कहा कि डब्ल्यूएफआई के पास निश्चित दिशानिर्देश और समयसीमा होनी चाहिए क्योंकि इनके अभाव में अन्याय की स्थिति पैदा होती है। अदालत की यह टिप्पणी पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी करने वाली विनेश ने 2026 सीनियर विश्व चैंपियनशिप के लिए महिलाओं के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी है। अदालत ने कहा कि वह इस आवेदन पर आदेश पारित करेगी।
सुनवाई के दौरान विनेश के वकील ने कहा कि वे बुधवार को कंस्टीट्यूशन क्लब में कारण बताओ नोटिस की बैठक में शामिल होने गए थे, लेकिन डब्ल्यूएफआई की ओर से वहां कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद महासंघ ने कहा कि वह बैठक में शामिल नहीं हुईं। वकील ने दलील दी, यह एक संस्थान द्वारा जानबूझकर मुझे निशाना बनाने का मामला है। प्रथम दृष्टया मैं उनकी ओर से दुर्भावना और पक्षपात दिखाने में सक्षम हूं। डब्ल्यूएफआई ने इस मामले में पूरी तरह मनमाना रवैया अपनाया है। उन्हें चयन मानदंड के बारे में केवल सात सितंबर को बताया गया जबकि ट्रायल 14 सितंबर को निर्धारित हैं।
अदालत ने कहा कि डब्ल्यूएफआई के पास निश्चित दिशानिर्देश और समयसीमा होनी चाहिए क्योंकि इनके अभाव में अन्याय की स्थिति पैदा होती है। अदालत की यह टिप्पणी पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी करने वाली विनेश ने 2026 सीनियर विश्व चैंपियनशिप के लिए महिलाओं के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी है। अदालत ने कहा कि वह इस आवेदन पर आदेश पारित करेगी।
सुनवाई के दौरान विनेश के वकील ने कहा कि वे बुधवार को कंस्टीट्यूशन क्लब में कारण बताओ नोटिस की बैठक में शामिल होने गए थे, लेकिन डब्ल्यूएफआई की ओर से वहां कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद महासंघ ने कहा कि वह बैठक में शामिल नहीं हुईं। वकील ने दलील दी, यह एक संस्थान द्वारा जानबूझकर मुझे निशाना बनाने का मामला है। प्रथम दृष्टया मैं उनकी ओर से दुर्भावना और पक्षपात दिखाने में सक्षम हूं। डब्ल्यूएफआई ने इस मामले में पूरी तरह मनमाना रवैया अपनाया है। उन्हें चयन मानदंड के बारे में केवल सात सितंबर को बताया गया जबकि ट्रायल 14 सितंबर को निर्धारित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
डब्ल्यूएफआई के वकील ने क्या कहा?
हालांकि डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि फोगाट को भाग लेने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है और अगर वह नीति के अनुसार पात्र हैं तो वह चयन ट्रायल में हिस्सा ले सकती हैं। उन्होंने कहा कि 2025 और 2026 के पदक विजेता पात्र होंगे और फोगाट का पदक जीतकर फिर से राज्यों तथा राष्ट्रीय चैंपियनशिप के जरिए शीर्ष स्तर पर लौटने के लिए स्वागत है क्योंकि उन्होंने कई वर्षों से पदक नहीं जीते हैं। वकील ने दलील दी, मातृत्व की बात करें तो ऐसी अन्य महिला पहलवान भी हैं जिन्होंने मातृत्व के बाद भारत के लिए पदक जीते हैं। वे अपनी ताकत वापस हासिल करती हैं। अच्छा प्रदर्शन करती हैं। वे पूरी तरह फिट होकर वापसी करती हैं और फिर उसी तरह प्रदर्शन करती हैं, जैसा गर्भावस्था से पहले करती थीं।
इस पर पीठ ने कहा कि समस्या मौजूदा नीति में है और महासंघ के कामकाज के लिए दिशानिर्देश तथा समयसीमा तय किए जाने की जरूरत बताई। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, यही समस्या है। एक महिला शादी करेगी, बच्चे को जन्म देगी और इस बीच पुरुष जाकर पदक जीतेंगे और फिर किसी प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर लेंगे जबकि महिला को घर बैठकर बच्चों की देखभाल करनी होगी। इस पहलू पर भी कुछ किया जाना चाहिए, अन्यथा यह बेहद अनुचित है।
उन्होंने कहा, कानून के पेशे में भी ऐसा ही है। जब कोई वकालत कर रहा होता है, वह बच्चे होने के बाद जब वापस लौटते हैं तो काम नहीं मिलता। हम इस समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि आप (महासंघ) ऐसा करने में विफल रहे हैं। इससे अधिक अनुचित क्या हो सकता है? इसलिए आपको कुछ ऐसे दिशानिर्देश बनाने होंगे जो देश के हित और व्यक्ति के हित के बीच संतुलन कायम करें।
हालांकि डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि फोगाट को भाग लेने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है और अगर वह नीति के अनुसार पात्र हैं तो वह चयन ट्रायल में हिस्सा ले सकती हैं। उन्होंने कहा कि 2025 और 2026 के पदक विजेता पात्र होंगे और फोगाट का पदक जीतकर फिर से राज्यों तथा राष्ट्रीय चैंपियनशिप के जरिए शीर्ष स्तर पर लौटने के लिए स्वागत है क्योंकि उन्होंने कई वर्षों से पदक नहीं जीते हैं। वकील ने दलील दी, मातृत्व की बात करें तो ऐसी अन्य महिला पहलवान भी हैं जिन्होंने मातृत्व के बाद भारत के लिए पदक जीते हैं। वे अपनी ताकत वापस हासिल करती हैं। अच्छा प्रदर्शन करती हैं। वे पूरी तरह फिट होकर वापसी करती हैं और फिर उसी तरह प्रदर्शन करती हैं, जैसा गर्भावस्था से पहले करती थीं।
इस पर पीठ ने कहा कि समस्या मौजूदा नीति में है और महासंघ के कामकाज के लिए दिशानिर्देश तथा समयसीमा तय किए जाने की जरूरत बताई। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, यही समस्या है। एक महिला शादी करेगी, बच्चे को जन्म देगी और इस बीच पुरुष जाकर पदक जीतेंगे और फिर किसी प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर लेंगे जबकि महिला को घर बैठकर बच्चों की देखभाल करनी होगी। इस पहलू पर भी कुछ किया जाना चाहिए, अन्यथा यह बेहद अनुचित है।
उन्होंने कहा, कानून के पेशे में भी ऐसा ही है। जब कोई वकालत कर रहा होता है, वह बच्चे होने के बाद जब वापस लौटते हैं तो काम नहीं मिलता। हम इस समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि आप (महासंघ) ऐसा करने में विफल रहे हैं। इससे अधिक अनुचित क्या हो सकता है? इसलिए आपको कुछ ऐसे दिशानिर्देश बनाने होंगे जो देश के हित और व्यक्ति के हित के बीच संतुलन कायम करें।