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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Tulsi Vivah 2022 Tulsi Ji Ki Aarti and Puja Mantra lyrics in hindi

Tulsi Vivah 2022: तुलसी विवाह के दिन पढ़ें ये आरती और मंत्र, विष्णु प्रिया होंगी प्रसन्न

Thu, 03 Nov 2022 10:23 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Thu, 03 Nov 2022 10:23 AM IST
सार

Tulsi Ji Ki Aarti & Puja Mantra Lyrics In Hindi: इस बार तुलसी जी का विवाह 5 नवंबर को है। इस दिन शाम के समय विधि-विधान से पूजन के साथ तुलसी जी का विवाह किया जाता है। विवाह के दौरान तुलसी जी की आरती और मंत्र जरूर पढ़ना चाहिए। 

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Tulsi Vivah 2022 Tulsi Ji Ki Aarti and Puja Mantra lyrics in hindi
तुलसी विवाह के दिन पढ़ें ये आरती और मंत्र - फोटो : amar ujala

विस्तार

Tulsi Vivah 2022: तुलसी भगवान विष्णु को बेहद प्रिय हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में प्रतिदिन तुलसी की पूजा की जाती है और जल दिया जाता है, उस घर में कभी भी दरिद्रता और दुर्भाग्य का वास नहीं होता है। उस घर में हमेशा मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। वैसे तो साल भर तुलसी जी की पूजा करनी चाहिए, लेकिन कार्तिक माह उनको प्रसन्न करने के लिए ज्यादा उत्तम माना जाता है। इस माह में श्री हरि विष्णु के विग्रह स्वरूप शालिग्राम जी और देवी तुलसी का विवाह संपन्न किया जाता है। इस बार तुलसी जी का विवाह 5 नवंबर को है। इस दिन शाम के समय विधि-विधान से पूजन के साथ तुलसी जी का विवाह किया जाता है। विवाह के दौरान तुलसी जी की आरती और मंत्र जरूर पढ़ना चाहिए। इससे पूजा का पूर्ण फल मिलता है। यहां से आप तुलसी विवाह की आरती और मंत्र पढ़ सकते हैं-   

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तुलसी माता का स्तुति मंत्र 

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः,
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।। 

मां तुलसी का पूजन मंत्र 

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।  

तुलसी माता का ध्यान मंत्र 

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।  

तुलसी माता की आरती 

जय जय तुलसी माता
सब जग की सुख दाता, वर दाता
जय जय तुलसी माता ।।

सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर
रुज से रक्षा करके भव त्राता
जय जय तुलसी माता।।

बटु पुत्री हे श्यामा, सुर बल्ली हे ग्राम्या
विष्णु प्रिये जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता
जय जय तुलसी माता ।।

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वन्दित
पतित जनो की तारिणी विख्याता
जय जय तुलसी माता ।।

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में
मानवलोक तुम्ही से सुख संपति पाता
जय जय तुलसी माता ।।

हरि को तुम अति प्यारी, श्यामवरण तुम्हारी
प्रेम अजब हैं उनका तुमसे कैसा नाता
जय जय तुलसी माता ।।

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