5 अगस्त, बुधवार को राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का काफी लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। हिंदू धर्म में भूमि पूजन का विशेष महत्व होता है। भूमि पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि पूजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आज भी भूमि में निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि पूजन किया जाता है। आज हम आपको बताएंगे भूमि पूजन क्यों और कैसे किया जाता है। साथ ही आपको ये भी बताएंगे कि भूमि पूजन में किन चीजों की आवश्यकता होती है।
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Ram Mandir Bhoomi Pujan: कैसे और क्यों किया जाता है भूमि पूजन? जानिए सामग्री की पूरी लिस्ट
Fri, 24 Jul 2020 11:29 PM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश जोशी
Updated Fri, 24 Jul 2020 11:29 PM IST
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5 अगस्त, बुधवार को राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया जाएगा
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भूमि पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि पूजन किया जाना चाहिए
- फोटो : social media
शास्त्रों में है भूमि पूजन का वर्णन
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भूमि समस्त जग की जननी हैं। भूमि को जग की पालनहार माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में भूमि को मां का दर्जा प्राप्त है। धार्मिक शास्त्रों में भी इस बात का वर्णन है कि भूमि पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि पूजन किया जाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि भूमि पूजन न करने से निर्माण कार्य में कई तरह की बाधाएं आ सकती हैं।
भूमि पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि पूजन किया जाता है- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
क्यों किया जाता है भूमि पूजन
- भूमि पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भूमि पूजन करने से भूमि संबंधित दोष दूर हो जाते हैं। भूमि पर दोष होने से निर्माण कार्य में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं। निर्माण कार्य में किसी तरह की समस्याएं न आए, इसलिए भूमि पूजन किया जाता है और धरती मां से सभी दोषों को दूर करने के लिए प्रार्थना की जाती है। भूमि पूजन करने से भूमि पवित्र हो जाती है।
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भूमि पूजन- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
भूमि पूजन कैसे किया जाता है (भूमि-पूजन विधि)
- सबसे पहले जिस भूमि का भूमि पूजन होना हो उसे अच्छी तरह से साफ कर लें।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भूमि पूजन करते समय ब्राह्मण को उत्तर दिशा में मुंह करके पालथी मारकर बैठना चाहिए।
- जातक को पूर्व दिशा में मुंह करके बैठना चाहिए।
- यदि जातक का विवाह हो गया हो तो जातक की पत्नि को पति के बाईं तरफ बैठना चाहिए।
- सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
- भूमि पूजन में चांदी के नाग और कलश की पूजा करने का विधान है।
- कलश में दूध, दही, घी डाल जाता है और शेषनाग का आह्वान किया जाता है।
- कलश में सिक्का और सुपारी भी डाली जाती है।
- कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक और भगवान विष्णु का स्वरूप मानकर पूजा करने का विधान है।
- भगवान विष्णु से प्रार्थना की जाती है कि वे देवी लक्ष्मी सहित इस भूमि पर विराजमान रहें।
- भगवान शेषनाग से प्रार्थना की जाती है कि जिस तरह से उन्होंने पृथ्वी को संभाला हुआ है उसी तरह से इस भूमि को भी संभालने की कृपा करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शेषनाग ने अपने फन पर पृथ्वी को उठा रखा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
भूमि पूजन सामग्री
- गंगाजल
- आम के पत्ते
- पान के पत्ते
- फूल
- रोली
- चावल
- कलावा
- लाल सूती कपड़ा
- कपूर
- देशी घी
- कलश
- फल
- दुर्बा घास
- नाग- नागिन का जोड़ा
- लौंग
- इलाइची
- सुपारी
- धूप- अगरबत्ती
- सिक्के
- हल्दी पाउडर, इत्यादि।