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Pitru Paksha 2020:12 तरह के होते हैं श्राद्ध, तर्पण करने मिलता है पितरों का आशीर्वाद

Wed, 02 Sep 2020 06:55 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 02 Sep 2020 06:55 AM IST
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Pitru Paksha 2020: know type of shradh during pitru paksha
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हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है। इसमें पितरों का तर्पण और पिंडदान करने का महत्व है। पितृपक्ष भाद्रपद की श्राद्ध पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन माह की सर्वपितृ अमावस्या तक 16 दिनों तक चलता है। मान्यता है हर वर्ष पितृ पक्ष के दौरान पितरदेव अपने परिजनों से मिलने के लिए धरती पर आते हैं। ऐसे में उनके परिजन जो जीवित है पितृपक्ष में उन्हें तर्पण और पिंडदान कर उन्हें प्रसन्न करते हैं। शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष पर कई तरह के श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। जिसमें 12 तरह के श्राद्ध के बारे में वर्णन किया गया है जो इस प्रकार है। 

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Pitru Paksha 2020: जानिए कहां-कहां पितरों को तर्पण करने से मिलता है विशेष पुण्य

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  1. नित्य श्राद्ध- पितृपक्ष के पूरे दिनों में हर रोज जल, अन्न, दूध और कुश से श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं।
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  3. नैमित्तिक श्राद्ध- माता-पिता की मृत्यु के दिन यह श्राद्ध किया जाता है। इसे एकोदिष्ट कहा जाता है।
  4. काम्य श्राद्ध- यह श्राद्ध विशेष सिद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
  5. वृद्धि श्राद्ध- सौभाग्य और सुख में कामना कामने के लिए वृद्धि श्राद्ध किया जाता है।
  6. सपिंडन श्राद्ध- यह श्राद्ध मृत व्यक्तियों को 12वें दिन किया जाता है। इसे महिलाएं भी कर सकती है।
  7. पार्वण श्राद्ध- इस श्राद्ध को पर्व की तिथि पर किया जाता है। इसलिए इसे पार्वण श्राद्ध कहा जाता है।
  8. गोष्ठी श्राद्ध- जो श्राद्ध परिवार के सभी सदस्य मिलकर करते हैं उसे गोष्ठी श्राद्ध कहा जाता है।
  9. शुद्धयर्थ श्राद्ध- पितृपक्ष में किया जाने वाले यह श्राद्ध परिवार की शुद्धता के लिए किया जाता है।
  10. कर्मांग श्राद्ध- किसी संस्कार के मौके पर किया जाने वाले श्राद्ध कर्मांग श्राद्ध कहलाता है।
  11. तीर्थ श्राद्ध- किसी तीर्थ पर किये जाने वाला श्राद्ध कर्म को तीर्थ श्राद्ध कहा जाता है।
  12. यात्रार्थ श्राद्ध- जो श्राद्ध यात्रा की सफलता के लिए किया जाता है उसे याश्रार्थ श्राद्ध कहा जाता है।
  13. पुष्टयर्थ श्राद्ध- जो  श्राद्ध आर्थिक उन्ननि के लिए किए जाते हो इसे पुष्टयर्थ श्राद्ध कहा जाता है।
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