मृत्यु को प्राप्त कर चुकी जीव आत्माओं के लिए पितृपक्ष काफी महत्वपूर्ण समय होता है। पितरों के प्रति श्रद्धा दिखाने का पक्ष श्राद्धपक्ष कहलाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष के भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्विन माह की सर्वपितृ अमावस्या तक का समय पितरों का होता है। मान्यता है पितृपक्ष के दौरान पितरलोक से हमारे पूर्वज अपने-अपने परिजनों से मिलने और उनको आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। पितृपक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए उन्हें तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान दिया जाता है। पितृपक्ष में ऐसा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। देश में कुछ ऐसे स्थान है जहां पर पितरों को तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व और पौराणिक इतिहास है।
Pitru Paksha 2020: जानिए कहां-कहां पितरों को तर्पण करने से मिलता है विशेष पुण्य
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गया
गया में पितरों का पिंडदान करने का विशेष महत्व है। बिहार की राजधानी पटना से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर फल्गु नदी के तट पर गया बसा हुआ है। पितृ पक्ष के दौरान यहां हजारों की संख्या में लोग अपने पितरों का पिण्डदान करते है। ऐसी मान्यता है कि यदि इस स्थान पर पिण्डदान किया जाय तो स्वर्ग मिलता है। भगवान राम ने भी अपने पिता का पिंडदान गया में ही किया था। पितृपक्ष में गया तीर्थ में जाकर हम पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके पितृऋण से मुक्ति पा सकते हैं क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु पितृ देवता के रूप में गयातीर्थ में निवास करते हैं।
प्रयाग को सभी तीर्थों में प्रमुख स्थान माना जाता है यहां पर तीन नदिया गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। पितृपक्ष में प्रयाग का विशेष स्थान है माना जाता है पितृपक्ष में बड़ी संख्या में लोग यहां पर अपने पूर्वजो को श्राद्ध देने आते हैं।
बद्रीनाथ
बद्रीनाथ भारत के चार प्रमुख धामों में एक है। यह स्थान भगवान विष्णु का है जहां पर विराजते है। बद्रीनाथ के ब्रहमाकपाल क्षेत्र में तीर्थयात्री अपने पितरों का आत्मा का शांति के लिए पिंडदान करते हैं। ऐसी मान्यता है यही पर पाण्डवों ने भी अपने पितरों का पिंडदान किया था।
सिद्धनाथ मध्य प्रदेश
यह स्थान उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे है यहां पर भी पितरों को श्राद्ध अर्पित करते है। ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर एक वटवृक्ष है जिसे माता पार्वती ने अपने हाथो से स्वयं लगाया था। पितर पक्ष में बड़ी संख्या में लोग इस स्थान पर अपने पितरों को श्राद्ध देते हैं।