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Paush Purnima 2025 Upay: पौष पूर्णिमा से महाकुंभ 2025 की हुई शुरुआत, जानें शुभ मुहूर्त और उपाय
Mon, 13 Jan 2025 09:52 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 13 Jan 2025 09:52 AM IST
सार
Paush Purnima 2025 Upay: पूर्णिमा तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान होता है। पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कालाओं से युक्त होता है। पूर्णिमा का व्रत रखने और गंगा स्नान करने से सभी तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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पौष पूर्णिमा 2025
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
Paush Purnima 2025 Upay: आज यानी 13 जनवरी को पौष माह की पूर्णिमा है और इस तिथि से प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत हो चुकी है । महाकुंभ 2025 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक चलेगा। महाकुंभ में संगम की रेती पर करीब 45 दिनों तक गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम धर्म, आध्यात्म की चर्चा और तप-साधना होती है। पौष पूर्णिमा के बाद माघ का महीना आरंभ हो जाएगा। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन पूजा, ध्यान, गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। पूर्णिमा तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान होता है। पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कालाओं से युक्त होता है। पूर्णिमा का व्रत रखने और गंगा स्नान करने से सभी तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
पौष पूर्णिमा तिथि 2025
पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 13 जनवरी को सुबह 5 बजकर 01 मिनट हो रही है और इसका समापन 14 जनवरी को सुबह 3 बजकर 57 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर पौष पूर्णिमा 13 जनवरी, मंगलवार को रखा जाएगा।
पौष पूर्णिमा स्नान शुभ मुहूर्त
पौष पूर्णिमा पर स्नान के लिए शुभ मुहूर्त ब्रह्रा मुहूर्त में सुबह 05 बजकर 02 मिनट लेकर सुबह 06 बजकर 22 मिनट तक है।
पौष पूर्णिमा के उपाय लाभ
पवित्र नदियों में करें स्नान
पौष पूर्णिमा पर गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान का बहुत महत्व है। इस दिन से ही माघ स्न्नान शुरू हो जाता है। मान्यता है कि इस दिन किसी पवित्र नदी में स्न्नान करने से प्राणी को मोक्ष मिलता है, सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में सौभाग्य का आगमन होता हैं।
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पौष पूर्णिमा के दिन सूर्य की उपासना करके जल अर्घ्य दें। इससे सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। सूर्य उपासना के लिए तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के फूल डालकर ऊं सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य देना चाहिए।
लक्ष्मी-नारायण की पूजा
पौष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें । पूर्णिमा के दिन कनकधारा स्त्रोत, श्रीसूक्त और विष्णु (भगवान विष्णु मंत्र) सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।
पितरों को तर्पण का महत्व
पौष पूर्णिमा के दिन पितरों का तर्पण अवश्य करें। इससे पितृ प्रसन्न हो सकते हैं और व्यक्ति की सभी मनोकामना भी पूरी होती हैं।
दान का महत्व
पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान और पूजा पाठ के बाद दान-दक्षिणा अवश्य करें। इससे सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
पौष पूर्णिमा पर महाकुंभ 2025 का आगाज
लंबी तैयारियों के बाद प्रयागराज में पौष पूर्णिमा पर महाकुंभ 2025 की शुरू हो जाएगी। दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन तीन पवित्र नदियों के संगम पर होगा। इस धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से करोड़ों की संख्या में लोग आएंगे और पवित्र त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ की प्राप्ति करेंगे। महाकुंभ में प्रमुख तिथियों पर स्नान और अमृत स्नान का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं प्रमुख स्नान और अमृत स्नान की तिथियां।
स्नान और अमृत स्नान की तिथियां
13 जनवरी (सोमवार)- स्नान, पौष पूर्णिमा
14 जनवरी (मंगलवार)- अमृत स्नान, मकर सक्रांति
29 जनवरी (बुधवार)- अमृत स्नान मौनी अमावस्या
3 फरवरी (सोमवार)- अमृत स्नान, बसंत पंचमी
12 फरवरी (बुधवार)- स्नान, माघी पूर्णिमा
26 फरवरी (बुधवार)- स्नान, महाशिवरात्रि
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पौष पूर्णिमा तिथि 2025
पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 13 जनवरी को सुबह 5 बजकर 01 मिनट हो रही है और इसका समापन 14 जनवरी को सुबह 3 बजकर 57 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर पौष पूर्णिमा 13 जनवरी, मंगलवार को रखा जाएगा।
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पौष पूर्णिमा स्नान शुभ मुहूर्त
पौष पूर्णिमा पर स्नान के लिए शुभ मुहूर्त ब्रह्रा मुहूर्त में सुबह 05 बजकर 02 मिनट लेकर सुबह 06 बजकर 22 मिनट तक है।
पौष पूर्णिमा के उपाय लाभ
पवित्र नदियों में करें स्नान
पौष पूर्णिमा पर गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान का बहुत महत्व है। इस दिन से ही माघ स्न्नान शुरू हो जाता है। मान्यता है कि इस दिन किसी पवित्र नदी में स्न्नान करने से प्राणी को मोक्ष मिलता है, सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में सौभाग्य का आगमन होता हैं।
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Mahakumbh First Shahi Snan: महाकुंभ का शुभारंभ 13 जनवरी से, लेकिन पहला शाही स्नान 13 या 14 को? यहां जानें
पौष पूर्णिमा पर सूर्यदेव की पूजापौष पूर्णिमा के दिन सूर्य की उपासना करके जल अर्घ्य दें। इससे सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। सूर्य उपासना के लिए तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के फूल डालकर ऊं सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य देना चाहिए।
लक्ष्मी-नारायण की पूजा
पौष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें । पूर्णिमा के दिन कनकधारा स्त्रोत, श्रीसूक्त और विष्णु (भगवान विष्णु मंत्र) सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।
पितरों को तर्पण का महत्व
पौष पूर्णिमा के दिन पितरों का तर्पण अवश्य करें। इससे पितृ प्रसन्न हो सकते हैं और व्यक्ति की सभी मनोकामना भी पूरी होती हैं।
दान का महत्व
पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान और पूजा पाठ के बाद दान-दक्षिणा अवश्य करें। इससे सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
पौष पूर्णिमा पर महाकुंभ 2025 का आगाज
लंबी तैयारियों के बाद प्रयागराज में पौष पूर्णिमा पर महाकुंभ 2025 की शुरू हो जाएगी। दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन तीन पवित्र नदियों के संगम पर होगा। इस धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से करोड़ों की संख्या में लोग आएंगे और पवित्र त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ की प्राप्ति करेंगे। महाकुंभ में प्रमुख तिथियों पर स्नान और अमृत स्नान का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं प्रमुख स्नान और अमृत स्नान की तिथियां।
स्नान और अमृत स्नान की तिथियां
13 जनवरी (सोमवार)- स्नान, पौष पूर्णिमा
14 जनवरी (मंगलवार)- अमृत स्नान, मकर सक्रांति
29 जनवरी (बुधवार)- अमृत स्नान मौनी अमावस्या
3 फरवरी (सोमवार)- अमृत स्नान, बसंत पंचमी
12 फरवरी (बुधवार)- स्नान, माघी पूर्णिमा
26 फरवरी (बुधवार)- स्नान, महाशिवरात्रि
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