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Magh Purnima 2024: इस कथा के बिना अधूरा है माघ पूर्णिमा का व्रत, जानिए पूजाविधि और कथा

Thu, 22 Feb 2024 10:20 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 22 Feb 2024 10:20 AM IST
सार

इस वर्ष माघी पूर्णिमा 24 फरवरी को मनाई जाएगी। इसके अलावा माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन वाग्देवी यानि सरस्वती के स्वरुप ललिता महाविद्या की जयंती भी है। 

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माघ मास भगवान विष्णु का अतिप्रिय होने से इस महीने की पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

विस्तार

Magh Purnima 2024: वैसे तो हर एक पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण, देवी लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना का विधान है। परन्तु माघ मास भगवान विष्णु का अतिप्रिय होने से इस महीने की पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस वर्ष माघी पूर्णिमा 24 फरवरी को मनाई जाएगी। इसके अलावा माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन वाग्देवी यानि सरस्वती के स्वरुप ललिता महाविद्या की जयंती भी है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान-दक्षिणा का बत्तीस गुना फल प्राप्त होता है। इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के पूजन और व्रत और कथा का श्रवण या वाचन करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है।

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माघ पूर्णिमा व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार कांतिका नगर में धनेश्वर नाम का ब्राह्मण निवास करता था। वह अपना जीवन निर्वाह दान पर करता था। ब्राह्मण और उसकी पत्नी के कोई संतान नही थी। एक दिन उसकी पत्नी नगर में भिक्षा मांगने गई, लेकिन सभी ने उसे बांझ कहकर भिक्षा देने से इनकार कर दिया। तब किसी ने उससे 16 दिन तक मां काली की पूजा करने को कहा। उसके कहे अनुसार ब्राह्मण दंपत्ति ने ऐसा ही किया। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर 16 दिन बाद मां काली प्रकट हुई। मां काली ने ब्राह्मण की पत्नी को गर्भवती होने का वरदान दिया और कहा कि अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रत्येक पूर्णिमा को तुम दीपक जलाओ। इस तरह हर पूर्णिमा के दिन तक दीपक बढ़ाती जाना जब तक कम से कम 32 दीपक न हो जाएं।
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ब्राह्मण ने अपनी पत्नी को पूजा के लिए पेड़ से आम का कच्चा फल तोड़कर दिया। उसकी पत्नी ने पूजा की और फलस्वरूप वह गर्भवती हो गई। प्रत्येक पूर्णिमा को वह मां काली के कहे अनुसार दीपक जलाती रही। मां काली की कृपा से उनके घर एक पुत्र ने जन्म लिया, जिसका नाम देवदास रखा। देवदास जब बड़ा हुआ तो उसे अपने मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेजा गया। काशी में उन दोनों के साथ एक दुर्घटना घटी जिसके कारण धोखे से देवदास का विवाह हो गया। देवदास ने कहा कि वह अल्पायु है परंतु फिर भी जबरन उसका विवाह करवा दिया गया। कुछ समय बाद काल उसके प्राण लेने आया लेकिन ब्राह्मण दंपत्ति ने पूर्णिमा का व्रत रखा था, इसलिए काल उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाया। इस कथा के अनुसार सच्चे मन से पूर्णिमा के दिन व्रत करने से प्राणी को सभी संकट से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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माघ पूर्णिमा व्रत पूजा विधि
माघ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पूर्व गंगा में स्नान करना चाहिए। यदि गंगा स्नान संभव न हो तो पानी में गंगाजल मिलकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के उपरांत सूर्यदेव को ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें। इसके बाद लक्ष्मी-नारायण की पूजा प्रारंभ करें। मोली, रोली, कुमकुम, फल, फूल, पंचगव्य, पान, सुपारी, दूर्वा आदि चीजें भगवान को अर्पित करें। अंत में आरती और प्रार्थना करें। इसके बाद दिन में यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें। 

Magh Purnima 2024: माघ पूर्णिमा पर करें इन चीजों का दान, मिलेगा कई गुना पुण्य फल

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