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समय के साथ भगवान भी बदलते हैं

Mon, 06 Aug 2012 02:29 PM IST
Updated Mon, 06 Aug 2012 02:29 PM IST
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god also change with time
कुदरत का नियम है कि कोई भी चीज हमेशा-हमेशा के लिए नहीं रहता है। यह नियम भगवान पर भी लागू होता है। सभ्यता के आरम्भ से ही यह सिलसिला चला आ रहा है। पूर्व वैदिक काल में इन्द्र, वरूण, सूर्य प्रमुख देवता के रूप में पूजे जाते थे।
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लेकिन उत्तर वैदिक काल में प्रजापति, विष्णु और रूद्र प्रमुख हो गये। यह क्रम आज भी चला आ रहा है। कल तक जो देवी-देवता प्रमुख रूप से पूजे जाते थे उनकी जगह दूसरे देवी-देवता प्रमुख हो गये हैं।
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संतोषी माता की जगह वैभव लक्ष्मी
कुछ समय पहले तक शुक्रवार के दिन पर संतोषी माता का अधिकार था। शुक्रवार के दिन लोग संतोषी माता के नाम से व्रत किया करते थे। इस दिन खट्टा खाना मना था। संतोषी माता को गुड़ और चना का प्रसाद चढ़ता था। संतोषी माता का व्रत रखने वाले को 16 शुक्रवार व्रत रखकर उद्यापन करना होता था।
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इधर कुछ दिनों से संतोषी माता का स्थान वैभव लक्ष्मी माता ने ले लिया है। वैभव लक्ष्मी माता की पूजा से वही फल मिलता है जो संतोषी माता की पूजा से मिलता था। लेकिन दोनों की पूजा विधि में अंतर है। वैभव लक्ष्मी माता व्रत करने वाले को 21 या 11 व्रत करना होता है।

लक्ष्मी माता को लड्डू एवं बताशे का प्रसाद चढ़ता है। व्रत के उद्यापन में जितना व्रत आप करते हैं उतनी कन्याओं को भोजन करवाकर वैभव लक्ष्मी कथा की किताब भेंट करनी होती है। जिससे इस व्रत का प्रचार हो सके।

गुरू की जगह साईं बाबा
जिस तरह शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत प्रचलित था उसी प्रकार कुछ समय पहले तक गुरूवार का व्रत भी काफी लोकप्रियता था। इस व्रत में भगवान विष्णु और केले के पेड़ की पूजा की जाती थी। व्रत करने वाले पीला भोजन करना होता था।

इस दिन प्रसाद के तौर पर गुड़ एवं चने की दाल भगवान को अर्पित किया जाता था। ऐसी मान्यता थी कि इस व्रत को करने से विवाह में आने वाली बाधा दूर होती है। आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। पिछले कुछ समय से गुरूवार के दिन पर 18वीं सदी के संत साईबाबा ने कब्जा कर लिया है। लोग गुरूवार के दिन साईंबाबा के नाम से व्रत रखते हैं। साईबाबा को भूना हुआ चना और ईलांची दाना का प्रसाद चढ़ता है।

ऐसी मान्यता है कि साईं भगवान राम के अवतार हैं। इसलिए इन्हें साईं राम भी लोग कहने लगे हैं। साईं बाबा दयालु संत हैं जो सभी की फरियाद जल्दी सुनते हैं। साईं की इसी महिमा के कारण दिनानुदिन साईं भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है।

वास्तव में भगवान कौन
अब सवाल उठता है कि असल में भगवान कौन हैं। भगवान शाश्वत हैं उन पर समय और प्रकृति का कोई असर नहीं होता है। यह गीता और अन्य शास्त्रों में भी वर्णित है। इस आधार पर देवता दो ही हैं जो नित हमारी सुध लेते हैं। सृष्टि के आरम्भ से लेकर सृष्टि के अंत तक अगर कुछ है तो सूर्य और चन्द्र ही है।


इसलिए अपनी श्रद्घा को इनकी ओर केन्द्रित करना चाहिए। इनकी पूजा से आपको शक्ति और आत्मबल मिलेगा जिससे आप स्वयं ही सबकुछ करने समर्थ हो सकेंगे। बार-बार श्रद्घा एवं ईश्वर परिवर्तन को भगवान श्रीकृष्ण ने ग़लत बताया है। श्रीकृष्ण के अनुसार ऐसा करने वाला भ्रमित होकर वास्तविक सत्ता से दूर हो जाता है।
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