Shanishchari Amavasya: शनिश्चरी अमावस्या पर करें शनि के 108 नामों जाप, मिल सकती है हर कष्ट से मुक्ति
Shani Dev Names: शनि देव के नाम और मंत्रों का जाप शनिश्चरी अमावस्या पर विशेष रूप से लाभकारी होता है। अगर आप पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ इनका जप करते हैं, तो शनिदेव की कृपा से आपकी सारी परेशानियाँ दूर हो सकती हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त हो सकती है।
विस्तार
Shani Dev 108 Names: शनि देव को कर्मों का न्यायाधीश माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जिन लोगों पर उनकी कृपा होती है, उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है और उन्हें किसी प्रकार की कमी या दुख का सामना नहीं करना पड़ता। वहीं जिन पर शनि की टेढ़ी नजर पड़ती है, उनके जीवन में परेशानियां, आर्थिक तंगी और असफलताएं लगातार बनी रहती हैं। ऐसे लोग कई तरह के उपाय करने के बावजूद भी राहत नहीं पा पाते।
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अगर आप भी शनि की साढ़े साती, ढैया या शनि दोष से पीड़ित हैं और अब तक किए गए उपायों से कोई लाभ नहीं मिला है, तो शनिश्चरी अमावस्या का दिन आपके लिए बहुत खास हो सकता है। इस विशेष दिन पर एक सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय करके आप शनि दोष से मुक्ति पा सकते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति वापस ला सकते हैं। आइए जानते हैं वह उपाय क्या है।
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शनि देव के 108 नाम
माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति शनिश्चरी अमावस्या के दिन पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ शनिदेव के 108 नामों का जप करता है, तो उसे शनि दोष, साढ़े साती या ढैया जैसी परेशानियों से राहत मिल सकती है। साथ ही, यदि इसके साथ शनि निवारण मंत्र का भी नियमित रूप से जाप किया जाए, तो शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे न केवल जीवन की समस्याएं दूर होती हैं, बल्कि व्यक्ति को धन, सफलता और सुख-शांति भी प्राप्त होती है।
- घन
- सौम्य
- शरण्य
- सर्वाभीष्टप्रदायिन्
- सुरवन्द्य
- शनैश्चर
- सुरलोकविहारिण्
- सुखासनोपविष्ट
- सुंदर
- शांत
- घनरूप
- घनाभरणधारिण्
- घनसारविलेप
- खद्योत
- मन्द
- वरेण्य
- सर्वेश
- मन्दचेष्ट
- महनीयगुणात्मन्
- मर्त्यपावनपद
- महेश
- छायापुत्र
- शर्व
- शततूणीरधारिण्
- चरस्थिरस्वभाव
- अचञ्चल
- नीलवर्ण
- नित्य
- नीलाञ्जननिभ
- नीलाम्बरविभूशण
- निश्चल
- वेद्य
- विधिरूप
- विरोधाधारभूमी
- भेदास्पदस्वभाव
- वज्रदेह
- वैराग्यद
- वीर
- वीतरोगभय
- विपत्परम्परेश
- विश्ववन्द्य
- गृध्नवाह
- गूढ
- कूर्माङ्ग
- कुरूपिण्
- कुत्सित
- गुणाढ्य
- गोचर
- आयुष्यकारण
- आपदुद्धर्त्र
- विष्णुभक्त
- वशिन्
- अविद्यामूलनाश
- विद्याविद्यास्वरूपिण्
- विविधागमवेदिन्
- विधिस्तुत्य
- वन्द्य
- विरूपाक्ष
- वरिष्ठ
- गरिष्ठ
- वज्राङ्कुशधर
- वरदाभयहस्त
- वामन
- ज्येष्ठापत्नीसमेत
- श्रेष्ठ
- मितभाषिण्
- कष्टौघनाशकर्त्र
- पुष्टिद
- स्तुत्य
- स्तोत्रगम्य
- भक्तिवश्य
- अशेषजनवन्द्य
- विशेषफलदायिन्
- भानु
- भानुपुत्र
- भव्य
- पावन
- धनुर्मण्डलसंस्था
- धनदा
- धनुष्मत्
- तनुप्रकाशदेह
- तामस
- वशीकृतजनेश
- पशूनां पति
- खेचर
- घननीलाम्बर
- काठिन्यमानस
- आर्यगणस्तुत्य
- नीलच्छत्र
- नित्य
- निर्गुण
- गुणात्मन्
- निन्द्य
- वन्दनीय
- धीर
- दिव्यदेह
- दीनार्तिहरण
- क्रूर
- क्रूरचेष्ट
- दैन्यनाशकराय
- आर्यजनगण्य
- कामक्रोधकर
- कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारण
- परिपोषितभक्त
- परभीतिहर
- भक्तसंघमनोऽभीष्टफलद
- निरामय
- शनि
शनि दोष निवारण मंत्र
ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्।।
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।
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