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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Chandra Grahan 2022 Kartik Purnima Vrat Date Time Fasting Rules Importance In Hindi

Chandra Grahan 2022: देव दीपावली पर चंद्र ग्रहण का साया, जानें कब मनाएं कार्तिक पूर्णिमा ?

Sun, 06 Nov 2022 12:26 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 06 Nov 2022 12:26 PM IST
सार

भारत में आंशिक चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। 08 नवंबर को शाम को जैसे ही चंद्रोदय होगा उसी के साथ चंद्र ग्रहण शुरू हो जाएगा और यह शाम 06 बजकर 26 मिनट ग्रहण चलेगा।

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Chandra Grahan 2022 Kartik Purnima Vrat Date Time Fasting Rules Importance In Hindi
Purnima 2022: कार्तिक पूर्णिमा के दिन महादेव ने प्रदोष काल में अर्धनारीश्वर के रूप में त्रिपुरासुर का वध किया। उसी दिन देवताओं ने शिवलोक यानि काशी में आकर दीपावली मनाई। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Chandra Grahan 2022 Kartik Purnima Vrat Date Time : हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष स्थान माना गया है और जब यह पूर्णिमा कार्तिक महीने में आती है तो इसका महत्व काफी बढ़ जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक का महीना भगवान विष्णु,माता लक्ष्मी की पूजा, गंगा स्नान, दान, दीपदान और जप-तप का होता है। इस महीने में कई प्रमुख व्रत-त्योहार और उपवास रखे जाते हैं। इस बार कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 08 नवंबर 2022, मंगलवार के दिन है। कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा,त्रिपुरारी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन महादेव ने प्रदोष काल में अर्धनारीश्वर के रूप में त्रिपुरासुर का वध किया। उसी दिन देवताओं ने शिवलोक यानि काशी में आकर दीपावली मनाई। तभी से काशी में हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक मास के इस दिन काशी में दीप दान करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है। लेकिन इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है।  ऐसे में लोगों के मन में कार्तिक पूर्णिमा कब मनाई जाए, गंगा स्नान, पूजा-अनुष्ठान और दान कब करें आदि के बारे में कई तरह के प्रश्न उठ रहे हैं। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि के चांद का विशेष महत्व होता है ऐसे में इस दिन चंद्रमा के ऊपर राहु-केतु का साया रहने के कारण कई चीजों पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

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चंद्र ग्रहण की तिथि और समय
शास्त्रों के अनुसार जब भी चंद्र ग्रहण पड़ता है तो यह हमेशा पूर्णिमा तिथि के दिन होता है। 08 नवंबर को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण है। साल 2022 का यह आखिरी चंद्र ग्रहण भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में चंद्रग्रहण दिखाई देने के कारण इसका सूतक काल मान्य होगा। शास्त्रों में सूतक काल को बहुत ही अशुभ समय माना गया है। इसमें किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है और न ही देवी-देवताओं की पूजा-पाठ होती है। चंद्र ग्रहण शुरू होने से 09 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है। भारत में आंशिक चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। 08 नवंबर को शाम को जैसे ही चंद्रोदय होगा उसी के साथ चंद्र ग्रहण शुरू हो जाएगा और यह शाम 06 बजकर 26 मिनट ग्रहण चलेगा।
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कार्तिक पूर्णिमा तिथि
नवंबर 7, 2022 पूर्णिमा आरम्भ- 16:18 से 
नवंबर 8, 2022 पूर्णिमा समाप्त- 16:34 पर 

इस वर्ष कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि 07 नवंबर 2022 को शाम 04 बजकर 18 मिनट से शुरू हो जाएगी जो 08 नवंबर 2022 को शाम 04 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। 08 नवंबर को चंद्र ग्रहण लगेगा और इससे  09 घंटे पहले सुबह से ग्रहण का सूतक काल आरंभ हो जाएगा। इस कारण कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और दान ग्रहण के अगले दिन भी यानी 09 नवंबर को सुबह किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय सूतक काल लगने पर किसी भी तरह का कोई भी पूजा-पाठ और अनुष्ठान नहीं किया जा सकता है। 
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कार्तिक पूर्णिमा चंद्र ग्रहण का साया- दो दिन होगा दीपदान
हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष दिवाली के बाद कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान, दीपदान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। लेकिन इस बार कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। इस कारण से दो दिन दीपदान और गंगा स्नान किया जा सकता है। 06 नवंबर की शाम को चतुर्दशी तिथि फिर 7 नवंबर को पूर्णिम तिथि और 09 नवंबर को प्रतिपदा शुरू हो जाएगी। ऐसे में 07 नवंबर की शाम को दीपदान किया जा सकता है।


क्यों मनाते हैं देवता इस दिन दीपावली ?
पुराणों के अनुसार इस तिथि पर भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था और कार्तिक पूर्णिमा तिथि पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था। तब सभी देवी-देवता स्वर्ग लोक से काशी में आकर देव दीपावली का पर्व मनाया था। तभी से ये परंपरा काशी में चली आ रही हैं। इसके अलावा एक अन्य मान्यता है कि  भगवान विष्णु चार मास के लिए योग निद्रा में लीन होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी को पुनः जागते हैं। भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागरण से प्रसन्न होकर समस्त देवी-देवताओं ने पूर्णिमा को लक्ष्मी-नारायण की महाआरती करके दीप प्रज्वलित किए। यह दिन देवताओं की दीपावली है अतःइस दिन दीप दान व व्रत-पूजा आदि करके हम भी देवों की दीपावली में शामिल होते हैं।

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आपके शहर में 08 नवंबर को चंद्र ग्रहण का समय

शहर कब से शुरू शहर कब से शुरू
दिल्ली 5.28 नोएडा 5.30
अमृतसर 5.32 लखनऊ 5.16
भोपाल 5.36 लुधियाना 5.34
जयपुर 5.37 शिमला     5.20
मुंबई 6.01 कोलकाता 4.52
रायपुर 5.21 पटना 5.00
इंदौर 5.43 देहरादून 5.22
उदयपुर 5.49 गांधीनगर 5.55
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