Adi Shankaracharya Jayanti 2020: चार दिशाओं में चार मठ, आदि शंकराचार्य जी ने की थी स्थापना
- भारत के दक्षिण में रामेश्वरम में श्रृंगेरी शारदा मठ स्थित है। आदिशंकराचार्य द्वारा स्थापित यह मठ कर्नाटक के सबसे प्रसिद्ध मठों में से एक है। श्रृंगेरी मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद सरस्वती, भारती तथा पुरी संप्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ के अंतर्गत यजुर्वेद को रखा गया है।
मठ का महावाक्य
- 'अहं ब्रह्मास्मि'
प्रथम मठाधीश
- आचार्य सुरेश्वर जी
गोवर्धन मठ (ओडिशा)
- ओडिशा के पुरी में गोवर्धन मठ स्थित है। भगवान जगन्नाथ मंदिर से गोवर्धन मठ का संबंध है। गोवर्धन मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद 'वन' व 'आरण्य' सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ के अंतर्गत ऋग्वेद को रखा गया है।
मठ का महावाक्य
- 'प्रज्ञानं ब्रह्म'
प्रथम मठाधीश
- पद्मपाद चार्य।
शारदा मठ (गुजरात)
- शारदा मठ गुजरात में द्वारकाधाम में स्थित है। शारदा मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद 'तीर्थ' और 'आश्रम' सम्प्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ के अंतर्गत सामवेद'को रखा गया है।
मठ का महावाक्य
- 'तत्त्वमसि'
प्रथम मठाधीश
- हस्तामलक (पृथ्वीधर)
- उत्तराखंड के बदरीनाथ में ज्योतिर्मठ स्थित है। 8वीं सदी में आदी शंकराचार्य जी ने इसकी स्थापना की थी। ज्योतिर्मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले संन्यासियों के नाम के बाद 'गिरि', 'पर्वत' एवं ‘सागर’ संप्रदाय नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ के अंतर्गत अथर्ववेद को रखा गया है।
- 'अयमात्मा ब्रह्म'
- आचार्य तोटक