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Bhai Dooj 2020: भैयादूज पर क्यों बांधा जाता है भाई के हाथ पर कलावा
Mon, 16 Nov 2020 07:00 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 16 Nov 2020 07:00 AM IST
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Bhai Dooj 2020: बहन अपने भाइयों के रक्षासूत्र और माथे पर टीका लगाकर उनके खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं।
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दीपावली के दूसरे दिन भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व भैयादूज कार्तिक शुक्लपक्ष की द्वितीया यानि 16 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन बहन अपने भाइयों के रक्षासूत्र और माथे पर टीका लगाकर उनके खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं।
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क्या है रक्षासूत्र का महत्व
सनातन धर्म में अनेक रीति-रिवाज तथा मान्यताएं हैं जिनका सिर्फ धार्मिक ही नहीं, वैज्ञानिक पक्ष भी है जो वर्तमान समय में भी एकदम सटीक है। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान कलावा (रक्षासूत्र,मोली ) के बिना संपन्न नहीं होता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करते समय या नयी वस्तु खरीदने पर हम कलावा जरूर बांधते हैं ताकि वह हमारे जीवन में शुभता प्रदान करे। कलावा संकल्प, रक्षा एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार कलावा बाँधने से त्रिदेव -ब्रह्मा,विष्णु व महेश एवं त्रिदेवियां -लक्ष्मी,पार्वती व सरस्वती की असीम कृपा प्राप्त होती है।
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ऐसे शुरू हुई यह प्रथा
कलावा बाँधने की प्रथा तबसे चली आ रही है जब दानवीर राजा बली की अमरता के लिए श्री विष्णु अवतार वामन भगवान ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बाँधा था। आज भी विद्वान लोग कलावा बांधते वक्त इस मंत्र का उच्चारण करते हैं ।
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
सेहत के लिए अच्छा
शरीर विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो कलावा बाँधने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है। त्रिदोष -वात , पित्त तथा कफ का शरीर में संतुलन बना रहता है। शास्त्रों के अनुरूप पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बाँधना चाहिए एवं विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बाँधने का विधान है। कलावा बंधवाते समय उस हाथ की मुट्ठी को बंद रखकर दूसरा हाथ सिर पर रखना चाहिए। कलावे का बांधा जाना हमें उस संकल्प को याद करते रहना तथा उसकी पूर्ति के लिए प्रयास करते रहना सिखाता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से हाथ में कलावा बंधे होने से व्यक्ति को स्वयं ही परमात्मा द्वारा अपनी रक्षा होने का आभास होता है। जिससे मन में शांति व आत्मबल में वृद्धि होती है। व्यक्ति के मन -मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते।