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Anganwadi centers: बिना चिंता जा पाएंगे काम पर, प्रदेश में क्रैच वाले खुलेंगे 152 आंगनबाड़ी केंद्र

Wed, 11 Dec 2024 04:02 PM IST
Krishan Singh सुरेंद्र कौर, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
सुरेंद्र कौर, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 11 Dec 2024 04:02 PM IST
सार

केंद्र सरकार की ओर से इसकी मंजूरी मिल चुकी है। पालना केंद्रों का संचालन भी आंगनबाड़ी केंद्रों में ही किया जाएगा, साथ ही दो अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी होगी। 

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You will be able to go to work without worry, 152 Anganwadi centers with crèches will open in the state
आंगनबाड़ी केंद्र - फोटो : संवाद

विस्तार

महिला एवं बाल विकास विभाग प्रदेश में मिशन शक्ति के तहत 152 आंगनबाड़ी कम क्रैच खोलेगा। क्रैच खुलने से कामकाजी महिलाओं को राहत मिलेगी। साथ ही उनकी बच्चों को लेकर चिंता से काम भी प्रभावित नहीं होगा। क्रैचों को पालना नाम दिया है। केंद्र सरकार की ओर से इसकी मंजूरी मिल चुकी है। पालना केंद्रों का संचालन भी आंगनबाड़ी केंद्रों में ही किया जाएगा, साथ ही दो अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी होगी। एक क्रैच में 25 बच्चे रखे जा सकेंगे। इन केंद्रों में बच्चों की देखभाल के लिए सुबह 9:00 से शाम 5:00 बजे तक सुविधा मिलेगी। विभाग की ओर से बनाए केंद्रों में बच्चों को खाने-पीने से लेकर आराम और अन्य आवश्यक सुविधाएं दी जाएंगी।

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यह कदम उन कामकाजी महिलाओं के लिए सहायक सिद्ध होगा जो अपने छोटे बच्चों की देखभाल को लेकर चिंतित रहती हैं। पालना केंद्रों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा रही है। स्टाफ तैनाती के लिए भी गाइडलाइन बनाई जाएगी। बजट मिलने और अधिसूचना जारी होते ही इन केंद्रों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। विभाग एक आंगनबाड़ी कम क्रैच पर 50 हजार के करीब व्यय करेगा। यह क्रैच आंगनबाड़ी की सरकारी और निजी किसी भी भवन में खोले जाएंगे। एक केंद्र का किराया 8000 से 10,000 के बीच रहेगा। जिला कांगड़ा में भी विभाग ने 18 पालना केंद्रों के लिए भवनों का चयन किया है। विभाग की ओर से कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए यह अच्छी पहल है। विभाग की ओर से एसओपी और केंद्र की ओर से मिलने वाले आदेशों व बजट के बाद केंद्रों को खोल दिया जाएगा।

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यह पहल महिलाओं में सकारात्मक बदलाव लाएगी। मिशन शक्ति के तहत खुलने वाले पालना केंद्रों से महिलाओं का बच्चों के प्रति बढ़ती चिंता से कार्य प्रभावित नहीं होगा। केंद्रों में बच्चों के रहने, खाने-पीने और सोने जैसी सुविधाएं मिलेंगी।- अशोक शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी

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