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स्वामी गौरीश्वरानंद पुरी: सूर्य नमस्कार आसन के लिए रोज जरूर निकालें समय, स्वस्थ रहेंगे और कार्यशैली भी निखरेगी

Wed, 21 Jun 2023 05:07 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 21 Jun 2023 05:07 AM IST
सार

स्वामी गौरीश्वरानंद पुरी ने बताया कि योग से संबंधित व्यायाम में क्रिया, आसन, मुद्रा और प्राणायाम आते हैं। इनसे शरीर रोगमुक्त होता है। इससे चेहरे में लालिमा आएगी। विचार शुद्धि होगी। खानपान, निद्रा, विचार, कामकाज आदि सबकुछ नियमित हो जाएगा।

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Yog Guru Swami Gauriswranand Puri Maharaj said surya namaskar 12 poses is must for everyone
योगाचार्य स्वामी गौरीश्वरानंद पुरी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व योग दिवस पर कम से कम सूर्य नमस्कार आसन के लिए वक्त जरूर निकालें। सूर्य नमस्कार आसन को ठीक से किया जाए तो इसमें तमाम आसनों के गुण आ जाते हैं। सूर्य नमस्कार आसन में 12 पोज हैं। इसे पांच बार करेंगे तो 60 पोज हो जाएंगे। ये पर्याप्त होते हैं। इसे अपनी रोज की आदत में भी शुमार कर लें। यह बात योगाचार्य स्वामी गौरीश्वरानंद पुरी ने कही। स्वामी गौरीश्वरानंद पुरी रामकृष्ण परमहंस की पत्नी मां शारदा के प्रशिष्य हैं और इन दिनों हिमाचल प्रदेश में ही योगासन, प्राणायाम और इससे संबंधित तमाम तरह के अभ्यास सिखा रहे हैं।

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मंगलवार को विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष बातचीत में स्वामी गौरीश्वरानंद पुरी ने बताया कि योग से संबंधित व्यायाम में क्रिया, आसन, मुद्रा और प्राणायाम आते हैं। इनसे शरीर रोगमुक्त होता है। इससे चेहरे में लालिमा आएगी। विचार शुद्धि होगी। खानपान, निद्रा, विचार, कामकाज आदि सबकुछ नियमित हो जाएगा। स्वामी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के स्वस्थ, सबल और रोगमुक्त बनने के लिए यह जरूरी है। क्रिया, मुद्रा और आसन से जहां शरीर स्वस्थ होता है, वहीं प्राणायाम से श्वसन क्रिया नियंत्रित होती है।
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ऐसे कर सकते हैं योग दिवस की शुरुआत
सुबह उठते ही वयस्कों के लिए तीन लीटर कोसा पानी पीना ठीक है। इसमें नींबू का रस और सेंधा नमक मिलाकर पिएं। जिन लोगों को शौच जाने में कठिनाई हो, वे विपरीतकरणी मुद्रा करें। इसमें लेटकर कमर को सहारा दें और दोनों टांगें 45 डिग्री पर उठाएं। सबसे पहले छह क्रियाओं नेति, धौति, नौली, वस्ती, कपालभाति और त्राटक से तन की शुद्धि की जाती है। नेति में मुख के सात द्वार साफ होते हैं।
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धौति में पेट साफ होता है। इसमें पानी पीकर उल्टा करने वाला प्रकार ही आसान है। सहज अग्निसार धौति भी की जा सकती है। इसके बाद एक अन्य प्रकार वस्त्र धौति है, इसे बगैर गुरु के प्रशिक्षण के कभी न करें। सामान्य जन नौली और त्राटक न करें। नौली तो फिर भी आसान है। पर त्राटक तो बहुत ही आगे की अवस्था में किया जा सकता है। इसे शुरुआती अवस्था में करना हानिकारक हो सकता है।


फिर कपालभाति करें। इसमें एक सेकंड में एक स्ट्रोक और कुल 60 स्ट्रोक करें। खानपान का भी ध्यान रखें। अतिरिक्त चर्बी वाले चावल, चीनी, घी, आलू आदि न लें। सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिलकुल न सोएं। खाने में कभी भी तीन बजे के बाद गरिष्ठ भोजन न लें। सूर्योदय के बाद दांत से काटकर कोई वस्तु न लें। इस तरह की दिनचर्या आगामी दिनों में भी जारी रखें।

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