HPPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल, लिखित परीक्षा के टॉपर्स को इंटरव्यू में फिर किया बाहर
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हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा सहायक प्रोफेसर पद के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में टॉपर रहे नरेश कुमार को साक्षात्कार में आयोग ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। नरेश की तरह ही टॉप टेन में रहे कई अन्य उम्मीदवारों के बाहर होने से आयोग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
टॉपर आवेदकों का कहना है कि उन्होंने लिखित परीक्षा में टॉप किया लेकिन, आयोग ने साक्षात्कार में उनके साथ भेदभाव कर उन्हें बाहर कर दिया। अब वह कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। लिखित परीक्षा के टॉपर नरेश कुमार का कहना है कि आयोग ने साक्षात्कार के लिए 100 नंबर रखे हैं।
अन्य किसी भी राज्य में ऐसी व्यवस्था अभी तक नहीं है। नरेश सहित अन्य अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि आयोग द्वारा लिखित परीक्षा में सूबे में टॉपर रहे व मेरिट में रहे युवाओं को साक्षात्कार के बहाने बाहर कर दिया गया है।
नरेश का सेट परीक्षा 2013 में प्रदेश में 5वां स्थान
कॉलेज कैडर सहायक प्रोफेसर राजनीति शास्त्र के 18 पद भरने के लिए दिसंबर 2017 में लोक सेवा आयोग द्वारा लिखित परीक्षा ली गई थी। जिसमें 13 पद सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों से भरे जाने थे। शेष 5 पद अन्य श्रेणियों के लिए थे। लिखित परीक्षा में नरेश कुमार निवासी सुनहन्न उपमंडल स्वारघाट जिला बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में टॉपर रहे थे।
नरेश कुमार के लिखित परीक्षा में 100 में से 87.50 अंक लिए थे। लेकिन 6 जून को आयोग की साक्षात्कार परीक्षा में नरेश कुमार को 100 में से मात्र 42 अंक दिए गए। टॉपर रहे नरेश कुमार का कहना है कि वह लगातार तीसरी बार कॉलेज कैडर राजनीति शास्त्र के सहायक प्रोफेसर की परीक्षा में अव्वल रहे लेकिन निजी साक्षात्कार में अंकों के खेल से उन्हें बाहर कर दिया गया।
नरेश कुमार ने कॉलेज कैडर की राज्य पात्रता परीक्षा 2013 में सूबे में 5वां स्थान प्राप्त किया था। जबकि राज्य पात्रता परीक्षा 2016 में सूबे में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। इसके अलावा नरेश कुमार ने पांच विषयों में राजनीति शास्त्र, हिंदी, समाज शास्त्र, लोक प्रशासन व इतिहास में मास्टर डिग्री प्राप्त की है।
इस फेहरिस्त में हैं और भी नाम
मंडी के नंदलाल ने सूबे में 82.50 अंक लेकर लिखित परीक्षा में चौथा रैंक लिया था। जबकि साक्षात्कार में मात्र 45 ही अंक ही मिले। नंदलाल 2015 में सूबे में दूसरे नंबर पर आए थे। इस बार नंदलाल को लगातार चौथी बार बाहर कर दिया गया।
बिलासपुर के राजेंद्र ने लिखित परीक्षा में 79.50 अंक लिए। साक्षात्कार में 38 अंक दिए गए। इससे वे भी बाहर हो गए। सुरेश कुमार निवासी सिरमौर को भी कॉलेज कैडर की परीक्षा में बेहतर रहने के बावजूद लागतार तीसरी बार बाहर कर दिए गए हैं।
इस संबंध में आयोग के चेयरमैन मेजर जनरल डीवीएस राणा का कहना है कि साक्षात्कार में पूरी तरह पारदर्शिता बरती गई है। साक्षात्कार के लिए पूरा बोर्ड बना होता है जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहते हैं। उनका कहना है कि यह जरूरी नहीं कि जो लिखित परीक्षा में टॉपर है वह साक्षात्कार में भी उतना ही बेहतर प्रदर्शन कर पाए।