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Shimla News: मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा
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एकादशी का मुहूर्त सात मई को सुबह 10:19 बजे से होगा शुरू, आठ मई दोपहर 12:29 बजे तक रहेगा
एकादशी पूजा करने से घर में आती है सुख समृद्धि
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। मोहिनी एकादशी का दिन अत्यंत विशेष होता है। इस दिन उपवास और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। वैदिक पंचांग के अनुसार मोहिनी एकादशी वैशाख मास की एकादशी तिथि 7 मई को सुबह 10:19 बजे शुरू होगी और 8 मई को दोपहर 12:29 बजे समाप्त होगी। ऐसे में एकादशी व्रत 8 मई को रखा जाएगा।
मोहिनी एकादशी को भगवान विष्णु से संबंधित माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया था। मोहिनी अवतार लेकर भगवान विष्णु ने देवताओं को अमृतपान करवा कर दैत्यों से उनकी रक्षा की थी। माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने भी विजय पाने के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत रखा था। इस दिन मोहिनी एकादशी व्रत को दृढ़ संकल्प के साथ करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और सुख-समृद्धि के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। माेहिनी एकादशी व्रत की पूजा थाली में चौकी, सुपारी, तुलसी दल, नारियल, पीला चंदन, पीला कपड़ा, आम के पत्ते, कुमकुम, फूल, मिठाई, अक्षत, लौंग, पंचमेवा, धूप, दीप, फल, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र जरूर शामिल करें।
गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश चंद्र नौटियाल ने बताया कि माेहिनी एकादशी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद शुभ मुहूर्त पर घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान विष्णु का जल से अभिषेक करें और भगवान विष्णु को पीले वस्त्र पहनाएं। बाद में भगवान विष्णु को भोग लगाएं, भोग में तुलसी जरूर शामिल करें। भगवान को सात्विक भोजन का ही भोग लगाएं और व्रत के दिन संकीर्तन करें।
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एकादशी पूजा करने से घर में आती है सुख समृद्धि
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। मोहिनी एकादशी का दिन अत्यंत विशेष होता है। इस दिन उपवास और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। वैदिक पंचांग के अनुसार मोहिनी एकादशी वैशाख मास की एकादशी तिथि 7 मई को सुबह 10:19 बजे शुरू होगी और 8 मई को दोपहर 12:29 बजे समाप्त होगी। ऐसे में एकादशी व्रत 8 मई को रखा जाएगा।
मोहिनी एकादशी को भगवान विष्णु से संबंधित माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया था। मोहिनी अवतार लेकर भगवान विष्णु ने देवताओं को अमृतपान करवा कर दैत्यों से उनकी रक्षा की थी। माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने भी विजय पाने के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत रखा था। इस दिन मोहिनी एकादशी व्रत को दृढ़ संकल्प के साथ करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और सुख-समृद्धि के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। माेहिनी एकादशी व्रत की पूजा थाली में चौकी, सुपारी, तुलसी दल, नारियल, पीला चंदन, पीला कपड़ा, आम के पत्ते, कुमकुम, फूल, मिठाई, अक्षत, लौंग, पंचमेवा, धूप, दीप, फल, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र जरूर शामिल करें।
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गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश चंद्र नौटियाल ने बताया कि माेहिनी एकादशी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद शुभ मुहूर्त पर घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान विष्णु का जल से अभिषेक करें और भगवान विष्णु को पीले वस्त्र पहनाएं। बाद में भगवान विष्णु को भोग लगाएं, भोग में तुलसी जरूर शामिल करें। भगवान को सात्विक भोजन का ही भोग लगाएं और व्रत के दिन संकीर्तन करें।
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