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हिमाचल में डब्ल्यूएचओ की टीम का सर्वे: ठंडे इलाकों में भी पनपने लगे मलेरिया के मच्छर

Thu, 14 Apr 2022 11:28 AM IST
अरविन्द ठाकुर आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 14 Apr 2022 11:28 AM IST
सार

प्रदेश में लगातार मौसम बदलने से तापमान बढ़ता जा रहा है। हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों में भी मौसम गर्म हो रहा है। इससे एनोफिल कलसिफेशिज मच्छर भी पहाड़ी क्षेत्र में पनपने में सक्षम हैं।

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who team survey in himachal reveals that malaria mosquito in cold areas
मच्छर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में मलेरिया के मच्छर गर्म मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ अब सोलन, शिमला और कंडाघाट के ठंडे और पहाड़ी इलाकों में भी पनपना शुरू हो गए हैं। पर्यावरण में लगातार आ रहे बदलाव के चलते मच्छर के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो गया है। सोलन के कंडाघाट, दाड़लाघाट, अर्की, शिमला के शोघी, तारादेवी, जुन्गा और बिलासपुर में ये मच्छर साल के आठ माह पैदा हो सकते हैं और लंबे समय तक जिंदा भी रह सकते हैं। इसका खुलासा हाल ही में एक परीक्षण में हुआ है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम ने मलेरिया को लेकर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वे किया है। इसमें पाया गया है कि ठंडे क्षेत्रों में भी मलेरिया के मच्छर पैदा हो रहे हैं। टीम ने विभाग को अलर्ट रहने के लिए कहा है। अलर्ट के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके लिए विशेष टीम गठित की गई है। यह टीम उन क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने जाएगी, जहां मलेरिया के मच्छर पनपने की आशंका है।
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प्रदेश में लगातार मौसम बदलने से तापमान बढ़ता जा रहा है। हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों में भी मौसम गर्म हो रहा है। इससे एनोफिल कलसिफेशिज मच्छर भी पहाड़ी क्षेत्र में पनपने में सक्षम हैं। प्रलाजमोडियम (प्रोटोजोआ) मच्छर की भी ज्यादा प्रजातियां प्रदेश में पाई जाने लगी हैं। औसतन 18 से 28 डिग्री और अधिकतम 30 से 32 डिग्री तापमान और नमी भी 50 से 80 फीसदी होने पर मलेरिया के मच्छर आसानी से पैर पसार सकते हैं। 
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आठ से नौ दिन में होता है मलेरिया
मलेरिया के मच्छर के काटने पर आठ से नौ दिन के भीतर मलेरिया के लक्षण आते हैं। इस अवधि में अगर कोई अन्य मच्छर उस संक्रमित व्यक्ति को काट ले तो इससे मलेरिया फैलने का खतरा रहता है। व्यक्ति के शरीर में 15 दिन तक प्रलाजमोडियम रहता है। इसकी जांच बुखार आने के तुरंत बाद होनी आवश्यक है।


जिन क्षेत्रों में डेंगू मच्छर पनप रहे हैं, वहां अब मलेरिया के मच्छर भी पैदा हो रहे हैं। जिन क्षेत्रों में ये मच्छर हाल ही में पैदा होने शुरू हुए हैं, वहां के लोगों को जागरूक करने के लिए शिविर लगाए जाएंगे। - डॉ. एके सिंह, जिला स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी 

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