सेब पर पड़ रही मौसम की मार
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मौसम के बदले मिजाज ने हिमाचल की सबसे बड़ी नकदी फसल सेब को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। अप्रैल माह में भी बर्फबारी और बारिश के चलते सेब की फ्लावरिंग ठीक से नहीं हो पा रही है।
ठंड के चलते परागण प्रक्रिया थम गई है। फलों की सेटिंग भी बाधित हो रही है। इससे जहां फसल कम होने की आशंका है, वहीं सेब सीजन भी लेट हो सकता है।
इससे करीब 3200 करोड़ के सालाना सेब कारोबार को झटका लग सकता है। ऊंचाई वाले इलाकों में भी कम तापमान से सेब की फसल प्रभावित हो रही है।
बारिश ने तोड़ी बागवानों की उम्मीदें
इस बार ठीक ठाक हिमपात के बाद माना जा रहा था कि चिलिंग ऑवर्स पूरे होने से सेब की फसल अच्छी होगी, लेकिन अप्रैल माह तक सर्दी खिंचने और लगातार बारिश से लाखों सेब बागवानों पर आफत आ गई है।
बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो यदि मौसम का मिजाज ऐसे ही रहा तो सेब सीजन लेट यानी अगस्त में ही शुरू हो सकता है। सामान्य तौर पर यह जुलाई के पहले पखवाड़े में ही शुरू हो जाता है।
लेट सीजन होने पर मार्केट में बाहरी सेब के आने से हिमाचली सेब को अच्छे दाम नहीं मिल पाएंगे। शिमला के अलावा कुल्लू, मंडी, सिरमौर, चंबा जैसे जिलों में सेब की फसल ज्यादा प्रभावित हो रही है।
ऐसे पड़ रहा असर
सेब के पौधों में फूल आने की प्रक्रिया के बीच मौसम साफ होना जरूरी होता है। तभी ठीक से फूल आ सकते हैं। इन फूलों पर मक्खियां परागण की प्रक्रिया से फलों की सेटिंग करती हैं।
मगर ठंड के कारण सेब के फलों की सेटिंग में सहायक मक्खियां इन दिनों बगीचों में दिख नहीं रहीं। इससे फल कम लगने की आशंका है। फलों का विकास भी प्रभावित होगा।
सेब विशेषज्ञ एवं डा. वाईएस परमार उद्यान एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने कहा कि फ्लावरिंग सभी क्षेत्रों में शुरू हो चुकी है। फ्लावरिंग प्रक्रिया के बीच मौसम साफ रहना जरूरी है। तभी परागण ठीक से होगा।
बारिश के बाद रात की ठंड भी फलों की सेटिंग में बाधक बनती है। मौसम के मौजूदा मिजाज से सेब सीजन भी लेट हो सकता है।