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Shimla News: 21 बांधों से मानकों के हिसाब से नहीं छोड़ा पानी, होगी कार्रवाई; मुख्य सचिव ने मांगी रिपोर्ट
Mon, 21 Aug 2023 12:48 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 21 Aug 2023 12:48 PM IST
सार
सरकार ने पाया है कि केवल बिलासपुर में कोल बांध और किन्नौर में कड़च्छम वांगतू परियोजना ने पानी छोड़ने के दिशा-निर्देशों का पालन किया है।
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मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सरकार ने पाया है कि राज्य के 23 बांधों में से 21 ने सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन किया है। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने बताया कि कम से कम 21 बांधों ने सुरक्षा मानदंडों का पालन नहीं किया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को बांधों से हुए नुकसान पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
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हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड द्वारा संचालित मंडी और सिरमौर के जटोन में, लारजी जलविद्युत परियोजना, शिमला में एचपी पावर कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित सावड़ा कुड्डू परियोजना और कुल्लू में सैंज उल्लंघनकर्ताओं में से हैं। प्रदेश में 9,203 मेगावाट की 23 परियोजनाएं हैं।
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ये नेशनल हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी), नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी), भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी), सतलुज जल विद्युत निगम, एसजेवीएनएल आदि की ओर से संचालित हैं। 1,916 मेगावाट क्षमता की छह और परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
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केवल बिलासपुर में कोल बांध और किन्नौर में कड़च्छम वांगतू परियोजना ने पानी छोड़ने के दिशा-निर्देशों का पालन किया है। सक्सेना ने कहा कि 2014 में बिना पूर्व चेतावनी के लारजी बांध से पानी छोड़े जाने के कारण आंध्र प्रदेश के 24 छात्रों के बह जाने के बाद प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया गया था। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के निचले इलाकों में बाढ़ का कारण पोंग, पंडोह और मलाणा बांधों से पानी छोड़ा जाना है।