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तीन जिलों से गिद्ध गायब, घटती संख्या देख वन्य जीव विभाग ने शुरू की गिनती

Sat, 23 Mar 2019 01:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर विनोद कुमार शर्मा, अमर उजाला, हमीरपुर
विनोद कुमार शर्मा, अमर उजाला, हमीरपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 23 Mar 2019 01:13 PM IST
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Vultures survey in Kangra by wildlife department himachal pradesh

पर्यावरण को साफ-सुथरा और संतुलित बनाए रखने में मददगार मूक मित्र गिद्ध प्रदेश के कई इलाकों में नजर नहीं आ रहे हैं। ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर जिलों में तो गिद्ध विलुप्त हो गए हैं। कांगड़ा जिले में इनकी उपस्थिति से अभी भी कुछ उम्मीद बची है। पर्यावरण मित्र इस विशाल पक्षी की तेजी से घटती संख्या को देखते हुए वन्य जीव विभाग ने गिद्धों के ताजा आंकड़े जुटाने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है।

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इस पर विस्तृत अध्ययन कर अप्रैल तक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर इनकी संख्या का आकलन किया जाएगा। साथ ही भविष्य में संरक्षण संबंधी उपाय भी सुझाए जाएंगे। विभाग के पहले करवाए गए सर्वे में भी तीन जिलों हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना में गिद्धों की संख्या में 99 फीसदी की कमी पाई गई थी। कांगड़ा जिले के लालपुर, सुखनाला और पौंग क्षेत्र में गिद्ध दिखाई देते हैं।
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इसी के चलते विभाग अब कांगड़ा में गिद्धों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। पिछले वर्ष किए सर्वे में कांगड़ा में गिद्धों के 356 घोंसले और 313 बच्चे मिले थे। यह संख्या बीते वर्षों के मुकाबले ज्यादा थी। इस बार के सर्वे में विभाग को इससे अधिक घोंसले और बच्चे मिलने की उम्मीद है। गिद्ध अन्य स्थानों की ओर पलायन न करें इसके लिए फीडिंग स्टेशन भी बनाए गए हैं।
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गिद्ध खुद पर्यावरण को साफ बनाए रखने का काम करते हैं। खुले में किसी जानवर के मरने पर गिद्ध उन्हें अपना भोजन बना लेते हैं जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। प्रशासन या स्थानीय निकायों को भी कोई काम नहीं करना पड़ता।

इसलिए गिद्धों पर छाया संकट

दुधारू पशुओं में दूध की क्षमता बढ़ाने के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन का गिद्धों पर विपरीत असर पड़ रहा था। जानवर के मरने के बाद गिद्ध जब उन्हें खाते हैं तो उस दवा का विपरीत असर उन पर पड़ता है। इससे गिद्धों की मौत हो रही थी।

इसी कारण गिद्धों की संख्या भी घटने लगी। अब जब जानवरों के मरने के बाद खुले में फेंकने से संक्रमण बढ़ने लगा तो गिद्धों के संरक्षण और प्रजनन प्रोजेक्टों पर काम करना अनिवार्य हो गया। 

कांगड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में गिद्धों की संख्या जानने के लिए सर्वे शुरू किया है। इसकी रिपोर्ट अप्रैल में तैयार कर ली जाएगी। - विनोद कुमार शर्मा, डीएफओ, वन्य जीव विभाग, हमीरपुर

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