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राज्यपाल मामले में सीएम का यू-टर्न, कहा ले सकते हैं बैठक

Sat, 07 Nov 2015 08:46 PM IST
Updated Sat, 07 Nov 2015 08:46 PM IST
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virbhadra singh and hp govt u turn on governor meeting issue.

राज्यपाल मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यू टर्न ले लिया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि राज्यपाल इस तरह की बैठक कर सकते हैं। बात का बतंगड़ बनाया जा रहा है। जानकारी लेने के लिए राज्यपाल अधिकारियों को पूछ सकते हैं। इसमें असंवैधानिक कुछ नहीं है।

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शनिवार को कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख हैं। उनका अपना दायरा है और राज्य सरकार का अपना दायरा है।
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राजभवन शिमला में तीन नवंबर को जो बैठक हुई है, उसके बारे में राज्यपाल ने उनसे चर्चा की थी। यह पूछने पर कि फिर इस विवाद को कौन खड़ा कर रहा है? इस पर सीएम बोले कि यह मीडिया ही कर रहा है। कांग्रेस के नेताओं की ओर से राज्यपाल के समानांतर सरकार चलाने के बयानों पर मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया नहीं दी।
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सीएम के यू टर्न के बाद आक्रामक हुई भाजपा

virbhadra singh and hp govt u turn on governor meeting issue.

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता गणेश दत्त ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने अपनी गलती को सुधारते हुए राज्यपाल के खिलाफ दिए बयान से यू टर्न ले लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ संवाद को संवैधानिक करार दिया है। कहा कि राजभवन की ओर से अधिकारियों के साथ संवाद सरकार की मंजूरी और पूर्व जानकारी के साथ था।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेसी नेताओं को राज्यपाल के खिलाफ पूर्व में की गई टिप्पणियों और बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। पिछले कुछ दिनों से जिस तरह कांग्रेस नेताओं ने अपने बयानों से राज्यपाल पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, वह वास्तव में निराशाजनक और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार था। जब स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा गलती स्वीकार की जा चुकी है तो कांग्रेस नेताओं को भी उनका अनुसरण करना चाहिए।

उधर, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष सुनील ठाकुर ने युवा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य पर निशाना साधते हुए कहा कि कोई भी बयानबाजी करने से पूर्व वह अपने ही परिवार में सलाह मशविरा कर लिया करें। राज्यपाल को नसीहत देने से पूर्व अपने आचरण और राज्यपाल पद की गरिमा का आकलन कर लें। जब उनके पिता और मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के खिलाफ दिए गए बयानों से यू टर्न ले लिया गया है तो उन्हें भी माफी मांग लेनी चाहिए।

इधर, विक्रमादित्य ने किया राज्यपाल की मुहिम का स्वागत

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वहीं, विक्रमादित्य सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आपसी तालमेल और सद्भावना के उद्देश्य से संघ इस प्रकार के क्रिकेट मैच का आयोजन करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विविध संस्कृति है और प्रकृति ने राज्य को अपार सौंदर्य दिया है। संघ संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ युवाओं में खेल भावना को विकसित करने के लिए प्रयासरत है।

विक्रमादित्य सिंह ने राज्यपाल की ओर से नशे के खिलाफ और गौ रक्षा के प्रति उठाए गए कदमों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संघ उनके इन प्रयासों में पूर्ण सहयोग करेगा, जिससे युवाओं को सामाजिक बुराइयों से निजात मिल सके और सामाजिक कार्यों से जुड़ सके।

बाद में हिमाचल प्रदेश खेल, सांस्कृतिक एवं पर्यावरण संघ के अध्यक्ष विक्त्रस्मादित्य सिंह ने राज्यपाल को सम्मानित किया तथा दोनों टीमों के सदस्यों का परिचय करवाया। राज्यपाल ने टॉस किया और बोर्ड अध्यक्ष ने टॉस जीतकर पहले क्षेत्र रक्षण का निर्णय लिया।

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