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CM ने कहा, न ऑफिस शिफ्ट होंगे न कर्मचारी, धूमल बोले-ऐसी राजधानी का क्या फायदा

Sat, 18 Mar 2017 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 18 Mar 2017 09:58 AM IST
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Virbhadra Said That No Office or Employees Will Shift to Dharamshala.

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि धर्मशाला दूसरी राजधानी ही रहेगी, लेकिन शिमला से न तो कोई ऑफिस शिफ्ट होगा और न ही यहां से कर्मचारी-अधिकारी भेजे जाएंगे। अगर जरूरत पड़ी तो दूसरी राजधानी में नई भर्तियां की जाएंगी।

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उन्होंने कहा कि सरकार ने करीब डेढ़ लाख युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया है। साथ ही युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए कौशल विकास भत्ता भी दिया जाएगा। युवाओं को भत्ता उनकी जरूरतों को देखते हुए ही दिया जाएगा, सरकार कौशल बढ़ाने पर भी जोर देगी।
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मुख्यमंत्री शुक्रवार को विधानसभा में बजट पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बजट चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल और अन्य विधायकों की ओर से उठाए मसलों का एक-एक करके जवाब दिया।
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सीएम ने कहा कि प्रदेश के लोगों और वित्त विशेषज्ञों ने सरकार के बजट को सराहा है। मुख्यमंत्री का जवाब पूरा होने से पहले ही नेता प्रतिपक्ष धूमल और पूरा विपक्ष सदन से बाहर चला गया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने विधानसभा अध्यक्ष से इसे वाकआउट न मानने की गुजारिश की।

उन्होंने दलील दी कि नेता प्रतिपक्ष ने अपने वक्तव्य के दौरान कहा कि उन्हें जरूरी काम है, इसलिए वह जा रहे हैं। विपक्ष के विधायक उनके पीछे चले गए न कि वाकआउट किया। हालांकि स्पीकर ने उनकी इस मांग पर कोई फैसला नहीं दिया।

सीएम ने बताई वजह, क्यों हिमाचल पर बढ़ी है उधारी

Virbhadra Said That No Office or Employees Will Shift to Dharamshala.

लिमिट से ज्यादा लोन लेने के विपक्ष के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 में राजस्व घाटा अनुदान कम होने और साल 2012 में पंजाब सरकार के पे स्केल रिवीजन और फिर हिमाचल सरकार के इस पर अमल करने से हिमाचल पर उधारी बढ़ी।

उन्होंने कहा कि साल 2010-11 में 2232 करोड़ की अपेक्षा प्रदेश को साल 2014-15 में 406 करोड़ की ही ग्रांट मिली। इसके अलावा साल 2013-14 और 2014-15 में 13वें वित्त आयोग की सेंट्रल टैक्स में हिस्सेदारी को लेकर किया गया ओवर एस्टिमेट भी एक वजह है। इसके चलते दोनों ही साल प्रदेश को जीएसडीपी का तीन प्रतिशत उधार लेना पड़ा।

वहीं, 14वें वित्त आयोग ने साल 2015-16 व 2016-17 में भी ज्यादा टैक्स अर्जन संभावित किया गया। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने डेप्ट-जीएसडीपी रेश्यो को साल 2014-15 में कम कर 34.8 प्रतिशत ला दिया। सरकार ने जो भी लोन लिए वह केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लिए गए।

विभाग नहीं जाएंगे तो ऐसी राजधानी का क्या फायदा

Virbhadra Said That No Office or Employees Will Shift to Dharamshala.

पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि ऐसी राजधानी का क्या फायदा, जहां विभागों को शिफ्ट नहीं किया जा सके। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने की घोषणा की है, अब वीरभद्र सिंह विभागों को धर्मशाला के लिए शिफ्ट न करने की बात कह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव को देखते हुए वीरभद्र सिंह घोषणाओं पर घोषणाएं कर रहे हैं। स्थिति यह है कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य कुछ नहीं हो रहा है। धूमल ने कहा कि जहां तक धर्मशाला राजधानी की बात है तो वह आई वॉश है। घोषणाएं लोगों को लोगों को गुमराह करने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार हिमाचल सरकार को धन दे रही है।

लेकिन, प्रदेश सरकार इस पैसे को विकास कार्यों में खर्चने में नाकाम साबित हो रही  है। कांग्रेस सरकार ने चार साल के कार्यकाल में कुछ नहीं किया। अब विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं तो घोषणाएं कर लोगों का ध्यान बांटने की कोशिश की जा रही है। विधानसभा सदन से भाजपा विधायकों के बाहर आने पर नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने मीडिया को यह जानकारी दी। 

हाइवे की डीपीआर और नोटबंदी पर भी दिया बयान

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नए नेशनल हाईवे की डीपीआर न बनने पर सीएम ने कहा कि पहले केंद्र ने 56 एनएच को जुलाई 2016 में मंजूरी दी लेकिन नवंबर 2016 में यह बढ़कर 61 हो गए। इस बीच राज्य सरकार ने डीपीआर के लिए टेंडर भी कर दिए, लेकिन केंद्र ने गाइडलाइंस में बदलाव कर दिया।

सरकार को नए सिरे से डीपीआर बनाने की कवायद करनी पड़ रही है। मेडिकल क्लेम न होने के आरोपों पर कहा कि पिछले चार साल में 247 करोड़ रुपये मेडिकल बिल क्लीयर करने के लिए जारी किए गए। 2017-18 में भी 67 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।

नोटबंदी की वजह से जीडीपी में गिरावट
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आर्थिकी कृषि व बागवानी पर निर्भर है। 2016-17 में मौसम से कृषि-बागवानी पर विपरीत असर पड़ा। नोटबंदी की वजह से व्यापार और पर्यटन पर जबरदस्त असर पड़ा। पिछले चार साल में प्रदेश की आर्थिक स्थिति केंद्र की 6.8 प्रतिशत की अपेक्षा 7.4 प्रतिशत रही है।

चार साल में लगाए छह लाख नए सेब पौधे
सीएम ने कहा कि एप्पल रेजुवेनेशन स्कीम के तहत पिछले चार साल में करीब तीन लाख सेब के पुराने पेड़ों को उखाड़ा। करीब छह लाख नए पौधे लगाकर करीब छह हजार बागवानों को फायदा पहुंचाने का काम किया। एंटी हेलनेट स्कीम के तहत करीब 473.73 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है।

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