मोदी के सौ दिन के कार्यकाल पर वीरभद्र का ये बयान
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के 100 दिनों के कार्यकाल से जनता मायूस है। जनता की अपेक्षाओं के अनुसार भाजपा सरकार ने काम नहीं किया, जिससे लोगों का अब भ्रम टूटने लगा है।
हालांकि, 100 दिन के कामकाज का आकलन करना ठीक नहीं है। वह बुधवार को सचिवालय में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस पर स्कूलों में बच्चों से प्रधानमंत्री के सीधे संवाद पर कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां, विशेषकर जनजातीय और दूरदराज क्षेत्रों की स्थिति ऐसी है जहां पर बच्चों से संवाद कर पाना संभव नहीं है।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि वह कुगरी-सगनम घटनाक्रम से आहत हैं, जहां कुछ असंतुष्ट राजनीतिज्ञों ने दो पत्रकारों के साथ मिलकर इन पंचायतों के कुछ लोगों को फुसलाकर राष्ट्र विरोधी अनावश्यक चीन चलो का बयान जारी करवाया।
अतरगू और गुलिंग के बीच किरीनाला में आई बाढ़ के कारण एक छोटा पुल बह गया है, जिसका जल्द ही निर्माण कर लिया जाएगा। इसके निर्माण पर 1.63 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यहां पर पहले से ही रोपवे की व्यवस्था की गई है, जिससे फसल को मंडियों तक पहुंचाया जा सके।
शिक्षा विभाग से तलब की जाएगी रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश के कितने स्कूलों में शौचालय हैं या नहीं, इस पर मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग से दस दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। शिक्षा विभाग को यह भी आंकड़े उपलब्ध कराने होंगे, जिसमें यह उल्लेख किया गया हो कि कितने स्कूलों में छात्रों और छात्राओं के लिए शौचालय की व्यवस्था है।
हिमाचल में किसी भी सूरत में रैगिंग की घटनाओं को बर्दास्त नहीं किया जाएगा। ऐसी रैगिंग का क्या मतलब, जिसमें छात्र पढ़ाई छोड़ दे या फिर उनकी जान चली जाए।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बुधवार को नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बदले की भावना की राजनीति धूमल ने की है। धूमल सरकार के कार्यकाल में दो बार मेरे ऊपर केस किए गए, लेकिन कोर्ट से बरी हो गया।
हिमाचल के सीमांत क्षेत्रों की सड़कों, पुलों के कामकाज को केंद्र सरकार को टेकओवर करना चाहिए। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति कठिन होने के कारण एक बार बारिश से तो दूसरी बार बर्फबारी से सड़कें टूट जाती हैं। किन्नौर, लाहौल स्पीति जिले बेहद संवेदनशील हैं। सीमा के उस पार अक्सर हलचल होती रहती है।