फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   villages participation necessary To save the Himalayas: Dr Joshi

हिमालय को बचाने के लिए गांवों की भागीदारी जरूरी : डॉ. जोशी

Wed, 05 Dec 2018 10:12 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 05 Dec 2018 10:12 AM IST
विज्ञापन
villages participation necessary To save the Himalayas: Dr Joshi

पद्मश्री एवं पर्यावरणविद डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि हिमालय को बचाने और उसे संवारने के लिए गांवों और ग्रामीणों की भागीदारी जरूरी है। पर्यावरण के अनुकूल तकनीकी सहायता पहुंचाने से न सिर्फ वे खुद आगे बढ़ेंगे बल्कि हिमालय को होने वाले नुकसान से भी बचाएंगे। 

विज्ञापन


मंगलवार को केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) के सभागार में आयोजित कार्यशाला में जोशी ने कहा कि हिमाचल के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग हालात हैं। ऐसे में स्थानीय समुदाय केंद्रित तकनीक को प्राथमिकता देना जरूरी है।
विज्ञापन


इस बात पर खास ध्यान देना जरूरी है कि जो उपकरण या तकनीक तैयार की जा रही है, वह फील्ड में लोगों के काम की है या नहीं। इसी बिंदु पर फोकस करने से लोगों को तकनीक का फायदा मिलेगा और तकनीक की सार्थकता साबित होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

बंदरों से निपटने को उठाना होगा सख्त कदम : डॉ. तेज प्रताप

villages participation necessary To save the Himalayas: Dr Joshi

 केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के टेक्नोलॉजी इंटरवेंशन फार माउंटेन ईको सिस्टम : लाइवलीहुड इनहैंसमेंट थ्रू एक्शन रिसर्च एंड नेटवर्किंग (टाइम-लर्न)  प्रोग्राम की सालाना सामूहिक निगरानी कार्यशाला के दूसरे व अंतिम दिन चर्चा के दौरान टाइम के चेयरमैन और जीबीपीयूएटी के वीसी डॉ. तेज प्रताप,

डब्ल्यूआईआई देहरादून की डॉ. रुचि बडोला, जीबीपीआईएचईडी श्रीनगर के डॉ. आरके मैखुरी, हिमकास्ट के सदस्य सचिव डॉ. कुनाल सत्यार्थी, एचआरजी के डॉ. लाल सिंह और डीएसपी के डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल ने भी विचार रखे।

टाइम लर्न के चेयरमैन डॉ. तेज प्रताप ने कहा कि नीतियों को समय समय पर रिवाइज करना बेहद जरूरी है। हिमाचल में बंदरों की समस्या का सीधा कारण है कि आज बंदरों और इंसानों दोनों की आबादी बढ़ी है।

ऐसे में अगर उन्हें संरक्षण देने और बचाने की बात की जाती है तो फिर मानव अपनी आबादी नियंत्रित करे। ऐसा नहीं है तो विभाग को बंदर न मारने की अपनी नीति पर पुनर्विचार करना होगा।

कहा कि रिवाइज करने के साथ ही किसी भी नई नीति को बनाने से पहले प्री पॉलिसी रिसर्च भी करना चाहिए ताकि लोगों के लिए बनाई जा रही नीतियों से लोगों को सही फायदा मिल सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed