विजिलेंस ने कसा केसीसी बैंक पर शिकंजा, होने लगी अब ये जांच
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जयराम सरकार के सत्तासीन होने के बाद से ही विवादों में आए कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक पर स्टेट विजिलेंस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विजिलेंस ने बैंक प्रबंधन से पिछले पांच साल के दौरान वितरित किए गए लोन और एनपीए हुए लोन खातों की जानकारी मांगी है। पिछली सरकार के दौरान हुई भर्तियों का भी ब्योरा तलब किया गया है।
सरकार के निर्देश के बाद शुरू हुई विजिलेंस की कवायद से सूबे के कई सफेदपोश और अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दो साल पहले 26 दिसंबर, 2016 को पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत को कांग्रेस सरकार के खिलाफ चार्जशीट सौंपी थी।
इसमें कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक में हुए लोन घोटाले के अलावा बैंक प्रबंधन की ओर से विदेश यात्राओं पर की गई फिजूलखर्ची, वाहन खरीद, फर्नीचर व शाखा खोलने के लिए किराए पर लिए गए भवनों के चयन में कथित घोटाले का आरोप लगाया, लेकिन तत्कालीन वीरभद्र सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
नपेंगे कई सफेदपोश
इसके बाद नई सरकार के आते ही विधानसभा के दूसरे सत्र में नूरपुर से भाजपा विधायक राकेश पठानिया ने केसीसी बैंक की जांच की मांग उठा दी। सरकार ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाएगी, लेकिन इसे विजिलेंस को भेज दिया गया। अब विजिलेंस ने बैंक से पांच साल का रिकॉर्ड मांग लिया है।
सूत्रों की मानें तो विजिलेंस का सबसे ज्यादा फोकस लोन देने की प्रक्रिया और नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) होने पर हुई कार्रवाई पर है। चूंकि, अब सरकार ने कांगड़ा बैंक की हर गतिविधि की जांच के लिए कहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में विजिलेंस अपनी जांच का दायरा बढ़ा सकती है।