विधानसभा मानसून सत्र: प्राकृतिक आपदा पर हिमाचल में राहत मैनुअल में संशोधन करेगी हिमाचल सरकार
कांग्रेस विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने कहा कि कहीं पर भूस्खलन हो तो सरकार ने इस पर अनुदान देने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है। राहत मैनुअल के तहत दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाई जाए।
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हिमाचल प्रदेश में सरकार प्राकृतिक आपदा होने पर राहत मैनुअल में बदलाव करेगी। यह बात राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने नियम-130 के तहत कांग्रेस विधायक इंद्रदत्त लखनपाल, जगत सिंह नेगी और भाजपा विधायक बिक्रम सिंह जरयाल की ओर से सदन में लाए प्रस्ताव पर चर्चा के बाद कही। इस चर्चा के बीच वन मंत्री राकेश पठानिया ने भी कहा कि जंगलों की आग बुझाने के लिए एयर स्प्रे की संभावना देखी जा रही है। यह प्रस्ताव हिमाचल प्रदेश के वन क्षेत्रों में लगने वाली आग, अन्य क्षेत्रों में वर्षा से हो रहे भूस्खलन, अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसलों और संपत्तियों को हो रहे नुकसान से बचाव और राहत के लिए दी जाने वाली धनराशि बढ़ाने पर पेश किया गया।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने कहा कि कहीं पर भूस्खलन हो तो सरकार ने इस पर अनुदान देने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है। राहत मैनुअल के तहत दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाई जाए। वनों में जो अमूल्य लकड़ी है उसे बचाने के लिए भी ठोस काम होने चाहिए। भाजपा विधायक बिक्रम सिंह जरयाल ने कहा कि इस बार जंगलों में खूब आग लगी है। नुकसान की अनुमानित लागत बहुत आंकी गई है। किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि राहत मैनुअल के अनुसार जो पैसा दिया जाता है, वह बहुत कम रहता है। माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से विनती करना चाहते हैं कि वनों की आग को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। विधायक अरुण कूका, राजेंद्र राणा आदि ने कहा कि एक तो वनों में आग लगने से नुकसान होता है। इसमें बहुत सारे पेड़ खत्म हो जाते हैं। बहुत सारे मुल्क हेलिकॉप्टर की सेवाएं लेते हैं।