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बंदरों को वर्मिन घोषित करने की अधिसूचना को चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 14 Apr 2016 09:27 AM IST
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हिमाचल हाईकोर्ट
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राजधानी शिमला में बंदरों को वर्मिन घोषित करने वाली केंद्र सरकार की अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। राजेश्वर सिंह नेगी ने इस अधिसूचना के दूरगामी परिणामों के दृष्टिगत चुनौती दी है। 14 मार्च 2016 को जारी अधिसूचना के तहत बंदरों को हिंसक घोषित करते हुए यह आसान बनाया गया है कि किसी भी बंदर को बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के मारा जा सकता है।
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याचिका में कहा गया है कि इस अधिसूचना को जारी करने के पीछे मुख्य उद्देश्य बंदरों द्वारा लोगों की जान को खतरा और फसलों को नुकसान पहुंचाना दिया गया है। यह अधिसूचना केवल शिमला शहर के लिए ही जारी की गई है, जबकि ज्यादातर कृषि प्रदेश के अन्य भागों में की जाती है। सरकार ने बंदरों की प्रजाति को वर्मिन घोषित कर उन्हें मारने का प्रावधान बनाया है।
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प्रार्थी को कहना है कि बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने के लिए उन्हें मारने के बजाए वैज्ञानिक तरीके से इनसे निपटने का प्रावधान बनाना चाहिए। प्रार्थी के अनुसार इस अधिसूचना के बाद कोई भी कहीं भी शिमला शहर में बिना किसी आधिकारिक अनुमति के बंदरों
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को मार सकेगा, जिससे शिमला में बंदरों की संख्या में भारी कमी हो सकती है। इस अधिसूचना के कारण वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 11 बी का सरासर उल्लंघन हो रहा है। नगर निगम दायरे के लिए जारी यह अधिसूचना कानूनन गलत है। ऐसे में प्रार्थी ने अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की है।