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देवभूमि हिमाचल के शक्तिपीठों और मंदिरों में आज से गूंजेंगे जयकारे

Thu, 10 Sep 2020 10:21 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 10 Sep 2020 10:21 AM IST
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Unlock 4: Shakti Peeth and temples of Devbhoomi Himachal will open from today
बाबा बालक नाथ मंदिर शाहतलाई - फोटो : अमर उजाला

देवभूमि हिमाचल में शक्तिपीठों और धार्मिक स्थलों में गुरुवार से जयकारे गूंजेंगे। कोरोना काल के बीच साढ़े पांच माह के बाद श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक स्थल खुल जाएंगे। इसी के साथ आस्था और भक्ति के प्रतीक प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी, श्री नयनादेवी, बज्रेश्वरी, चामुंडा, ज्वालाजी के अलावा भीमाकाली और माता बालासुंदरी समेत बाबा बालकनाथ मंदिर, ऐतिहासिक पांवटा साहिब गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं के जयकारे गूंजने लगेंगे। इससे छोटे-मोटे कारोबार से जुड़े हजारों लोगों में भी उत्साह है। 

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सरकार ने चार सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में धार्मिक स्थल खोलने का फैसला लिया था। इसे लेकर भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया गया। इसके बाद प्रदेश के सभी जिलों में जिला प्रशासन ने धार्मिक स्थल खोलने के लिए तय एसओपी के तहत तैयारियों का अमलीजामा पहनाया गया है। राजधानी शिमला में संकटमोचन, तारादेवी और जाखू मंदिर के कपाट वीरवार सुबह खुल जाएंगे।
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सराहन स्थित प्रसिद्ध मां भीमाकाली मंदिर में सुबह सात से शाम साढ़े छह बजे तक भक्तों को माता के दर्शन करने की अनुमति रहेगी। शाम सात बजे मंदिर के कपाट बंद होंगे। मां चिंतपूर्णी का दरबार सुबह 9 से शाम 7 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा। श्रद्धालु प्रसाद ले जा सकेंगे, लेकिन इसे चढ़ाने पर मनाही रहेगी। श्री नयना देवी जी मंदिर में रोजाना एक हजार श्रद्धालु दर्शन कर पाएंगे। मंदिर में 60 साल से अधिक और 10 साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के प्रवेश पर फिलहाल रोक रहेगी। शक्तिपीठ बज्रेश्वरी मां के दर्शन भक्त सुबह सात से शाम सात बजे तक करेंगे।
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मंदिर में प्रसाद ले जाने पर मनाही होगी। मां चामुंडा के दर्शन भी इसी समय हो सकेंगे। हरियाणा और हिमाचल की सीमा पर त्रिलोकपुर स्थित माता बालासुंदरी मंदिर, पांवटा साहिब के ऐतिहासिक गुरुद्वारे में सुरक्षा के विशेष इंतजाम हैं। दियोटसिद्ध स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ई-पास बनवाना होगा। मंदिर प्रतिदिन सुबह छह बजे खुलेगा और शाम 7 बजे बजे बंद होगा। प्रतिदिन लगभग 500 श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी जाएगी।

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