केंद्रीय बजट: हिमाचल के विकास के लिए खुले केंद्रीय योजनाओं और सस्ते कर्ज के द्वार
केंद्रीय वित्त मंत्री ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश किया। इसमें कोविड से अस्तव्यस्त सभी राज्यों के लिए समग्र प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की घोषणा हुई। इसमें पूंजीगत व्यय के लिए एक लाख रुपये का आवंटन होगा। इसके तहत 50 वर्ष के लिए ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा। यह सामान्य ऋण के अलावा होगा।
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केंद्रीय बजट ने हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए केंद्रीय योजनाओं और सस्ते कर्ज के द्वार खोले हैं। बेशक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्य को लक्षित कर अलग से कोई घोषणा नहीं की, लेकिन सभी तरह के निवेशों के लिए पूंजीगत व्यय की राशि बढ़ाने का लाभ होगा। इससे चुनावी वर्ष में सूबे को 50 साल तक पर्याप्त कर्ज मुक्त ऋण मिलेगा। सकल राज्य घरेलू उत्पाद के विरुद्ध 3.5 के बजाय 4 फीसदी राजकोषीय घाटे की मंजूरी से विद्युत क्षेत्र के लिए राज्य 0.5 फीसदी अतिरिक्त कर्ज ले सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार राज्य की 5 से 7 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेने की पात्रता बन जाएगी। केंद्रीय वित्त मंत्री ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश किया। इसमें कोविड से अस्तव्यस्त सभी राज्यों के लिए समग्र प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की घोषणा हुई। इसमें पूंजीगत व्यय के लिए एक लाख रुपये का आवंटन होगा। इसके तहत 50 वर्ष के लिए ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा। यह सामान्य ऋण के अलावा होगा। चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए भी केंद्र से 600 करोड़ का ऋण मुक्त कर्ज लेने की अनुमति मिली थी।
पूंजीगत व्यय के लिए इस कर्ज की राशि को अगले वित्तीय वर्ष में देश के सभी राज्यों के लिए 10 हजार करोड़ से 10 गुणा बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये किया है तो स्वाभाविक रूप से इसकी सीमा को भी चुनाव सामने देख हिमाचल प्रदेश अच्छे से बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है। वर्ष 2022-23 के लिए राज्यों को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) पर चार फीसदी वित्तीय घाटे को रखने की मंजूरी मिली है। इससे पहले यह 3.5 फीसदी थी। हालांकि, सरकार इस तय सीमा को पार करती रही है। अब इस सीमा को बढ़ाने का लाभ होगा। यानी जीएसडीपी यानी कुल आय की 4 फीसदी सीमा तक कर्ज लेने के लिए प्रदेश सरकार अधिकृत होगी। इसका 0.5 फीसदी खर्च विद्युत क्षेत्र के सुधारों पर किया जा सकेगा। प्रदेश सरकार को नया संशोधित वेतनमान चुनावी साल में ही देना पड़ रहा है। कर्मचारियों की बहुत सी मांगों को पूरा नहीं किया तो उनका विरोध झेलने का सरकार जोखिम लेने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में राज्य में विकास का बजट घट गया है। इस संतुलन को बनाने में केंद्रीय बजट की ये घोषणाएं मददगार हो सकती हैं।
हिमाचल को इन केंद्रीय योजनाओं से होगा विशेष लाभ
- सड़कें, रेल, हवाई अड्डे, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, जलमार्ग बनाने में सहायता मिलेगी
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा
- जल जीवन मिशन में पर्याप्त बजट मिलेगा, जुुलाई 2022 तक सभी घरों तक पानी पहुंचेगा
- चीन शासित तिब्बत सीमा से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘वाइब्रंट विलेज’ योजना से विकास कार्य होंगे
- रोपवे बनाने के लिए नई योजना पर्वतमाला का लाभ मिलेगा
- बजट में वन स्वीकृतियां शीघ्र प्रदान करने का लाभ होगा
- नई पेंशन स्कीम में 14 प्रतिशत कर राहत का भी कर्मचारियों को लाभ होगा
- दिव्यांगों और उनके माता-पिता को कर में राहत देने की घोषणा का फायदा
- कृषि वानिकी में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को मदद
केंद्रीय बजट ने हिमाचल की कई मांगों को ठुकराया
-जीएसटी प्रतिपूर्ति को अगले तीन साल के लिए जारी करने की मांग नहीं मानी। जून 2022 के बाद यह प्रतिपूर्ति मिलना बंद होगी
- मंडी एयरपोर्ट को राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं किया
- प्रदेश के बल्क फार्मा पार्क का भी उल्लेख नहीं
- आयात शुल्क को 50 से 100 फीसदी की मांग उठाई, इस पर भी एलान नहीं
- निवेश को धरातल पर उतारने को नहीं मिला अलग से औद्योगिक पैकेज
बल्क ड्रग पार्क की घोषणा न होने से दवा निर्माता मायूस
फार्मा सेक्टर के लिए बजट मिला-जुला रहा है। एसएमई को तरजीह दी गई है। पुरानी स्कीमों की अवधि बढ़ाकर उद्योगपितयों को राहत दी गई है, लेकिन हिमाचल में एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब होने के बावजूद फार्मा संचालकों को निराशा हाथ लगी है। पहाड़ी राज्यों के लिए इन्वेस्टमेंट स्कीम 2022 में समाप्त हो रही है, इसे नहीं बढ़ाया गया। बल्क ड्रग फार्मा पार्क की ऊना के लिए घोषणा भी नहीं की गई है।
पुरानी योजनाओं की अवधि बढ़ाने का स्वागत
एचडीएमए के प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि बजट में इमरजेंसी क्रेडिट लोन गारंटी स्कीम की अवधि बढ़ाने, कुछ केमिकल के आयात पर कस्टम ड्यूटी कम करने, दो वर्ष के दौरान इन्कम टैक्स की रिटर्न में सुधार करने, नए उद्योग लगाने पर आयकर में छूट देना स्वागत योग्य है। लेकिन प्रदेश के दवा निर्माताओं को इन्वेस्टमेंट स्कीम की अवधि बढ़ाने व बल्क ड्रग पार्क ऊना के लिए घोषणा न करने पर मायूस होना पड़ा है।
बल्क ड्रग क्लस्टर तैयार होने से चीन पर निर्भरता होगी कम
फेडरेशन ऑफ इंडिया के हिमाचल इकाई के उपाध्यक्ष सुमित सिंगला ने कहा कि सरकार ने खाली जमीन पर क्लस्टर के रूप में बल्क पार्क खोलने की घोषणा से दवा निर्माताओं की चीन पर निर्भरता कम हो जाएगी। 53 क्रिटिकल ड्रग तैयार करने के लिए छह हजार 190 करोड़ की घोषणा की गई है। यह प्रोजेक्ट 8 साल में पूरा होगा। इससे भी चीन पर दवा निर्माताओं की निर्भरता कम होगी। कस्टम ड्यूटी कम करने से सामान के रेट कम होंगे, जिससे आम लोगों को फायदा होगा।
करों में छूट न देने से मध्य वर्ग के लोग मायूस
भारत उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर ने कहा कि मध्य वर्गीय लोगों को कर में कोई छूट नहीं दी गई है, जिससे लोगों को इस बजट से निराशा हाथ लगी है। सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए बजट में विशेष प्रावधान नहीं किया गया है।
दवाओं को जीएसटी के एक स्लैब में नहीं रखा
दवा विक्रेता सचिन बैंसल ने कहा कि बजट से दवा विक्रेताओं को निराशा हाथ लगी है। सभी दवाइयों को एक स्लैब में पांच फीसदी जीएसटी लाने की उम्मीद थी लेकिन बजट में यथावत रखा गया। दवाइयों के लिए जीएसटी तीन प्रकार से लिया जाता है। जीवन रक्षक दवाइयों पर पांच फीसदी, सामान्य दवाइयों पर 12 तथा फूड सप्लीमेंट पर 18 फीसदी जीएसटी है। लेकिन हर दवाई जीवन रक्षक होती है इसलिए इसे पांच फीसदी वाले स्लैब में रखने की मांग की थी।