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हर जागरूक आदमी आगे आए और मनोरोगियों का इलाज करे: श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Updated Sun, 02 Apr 2017 08:34 PM IST
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हिमाचल में भले लोग रहते हैं और सड़कों पर घूमते मनोरोगियों को रोटी-पानी देते हैं, तभी वे जीवित भी हैं। अगर हर जागरूक आदमी थोड़ा सा एक कदम आगे बढ़े और इनका इलाज करने को आगे आए तो सड़कों पर एक भी ऐसा मनोरोगी या पागल आदमी नजर नहीं आएगा। ये बात उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने प्रेस क्लब शिमला में एक पत्रकार वार्ता में कही।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश के तमाम लोग खुद आगे आकर जनांदोलन खड़ा करें। श्रीवास्तव ने एलान किया कि उमंग फाउंडेशन मनोरोगियों के इलाज को सुनिश्चित करवाने को हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर करेगी। कुछ पुलिस अधीक्षकों के विरुद्ध हाईकोर्ट में अवमानना का मामला दायर किया जाएगा। कहा कि कुछ पुलिस अधीक्षक मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 और हाई कोर्ट की ओर से बेसहारा मनोरोगियों के बारे में 4 जून, 2015 को दिए गए स्पष्ट आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन कर रहे हैं।
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यह जिम्मेवारी पुलिस की है कि वह अपने क्षेत्र में बेसहारा घूमने वाले मनोरोगियों का संज्ञान ले। उन्हें अपने संरक्षण में लेकर नजदीकी न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास पेश करें। मजिस्ट्रेट मनोरोगियों के मानसिक स्वास्थ्य की जांच, इलाज और पुनर्वास का आदेश देते हैं। हाई कोर्ट ने प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिया था कि वे बेसहारा मनोरोगियों के बारे में कानून का सख्ती से पालन करें।
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सोलन, सिरमौर और कुल्लू के पुलिस अधीक्षकों ने फाउंडेशन की ओर से बेसहारा मनोरोगियों की निश्चित जानकारी देने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया है। बताया कि प्रदेश के गृह सचिव ने 17 फरवरी और पुलिस महानिदेशक ने 20 फरवरी को सभी पुलिस
महानिरीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम तथा हाईकोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन करने के आदेश दिए। इसके बावजूद बेसहारा मनोरोगी सड़कों पर नर्क से बदतर जिंदगी जीने पर मजबूर हैं। इस दौरान उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी सुरेंद्र कुमार, विमला ठाकुर और एडवोकेट बलवंत सिंह ठाकुर भी मौजूद रहे।
इन मनोरोगियों की दी थी पुलिस अधीक्षकों को जानकारी
अजय श्रीवास्तव ने कहा कि सोलन जिले में शिमला-बिलासपुर रोड पर चमाकड़ी पुल के पास एक रेन शेल्टर में गंभीर हालत में रह रहे मनोरोगी के बारे में उन्होंने पुलिस अधीक्षक को 16 फरवरी को पत्र भेजा था। कई बार उन्हें फोन किया। सिरमौर की पुलिस अधीक्षक ने
पांवटा साहिब में दो बेसहारा महिला मनोरोगियों और सतौन में दो बेसहारा पुरुष के बारे में निश्चित जानकारी पत्र और फोन किए। कुल्लू के पुलिस अधीक्षक ने भी उमंग फाउंडेशन की ओर से बेसहारा मनोरोगियों की सूचना दिए जाने के बावजूद लापरवाही बरती।