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इंग्लैंड के ब्रिस्टल विवि ने किया शोध, बौद्ध भिक्षुओं पर हावी नहीं होता मानसिक तनाव

Mon, 02 Jul 2018 10:28 AM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 02 Jul 2018 10:28 AM IST
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UK University of Bristol Research on Buddhist monks for mental stress and depression

सामान्य लोगों की तुलना में बौद्ध भिक्षुओं को मानसिक तनाव कम होता है। प्रियजनों के बिछोह और अन्य दुखद परिस्थितियों में भी बौद्ध भिक्षु कम ही विचलित होते हैं। इंग्लैंड के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की ओर से धर्मशाला में रह रहे 331 भिक्षुओं पर किए गए शोध में यह बात सामने आई है। यह शोध एक ऑनलाइन शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोध को सामान्य और विधिवत ध्यान लगाने वाले भिक्षुओं पर किया गया।

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स विश्वविद्यालय से जुडे़ जी वर्मा और आर आर्या ने यह संयुक्त शोध ध्यान प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर पहुंचे भिक्षुओं और भिक्षुणियों पर केंद्रित किया। शोध का विषय साइकोलॉजिकल डिस्ट्रेस यानी मनोवैज्ञानिक परेशानी रखा गया।
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इसके लिए धर्मशाला और मैक्लोडगंज में स्थित बौद्ध मठों, आश्रमों और संबंधित केंद्रों में संपर्क किया गया। अध्ययन में 331 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। जो भी बौद्ध भिक्षु या भिक्षुणियां ध्यान के अभ्यास में काफी आगे थे, उनमें साइकोलॉजिकल डिस्ट्रेस के बहुत कम लक्षण देखे गए।

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तनावग्रस्त मरीजों का बगैर दवा उपचार संभव

UK University of Bristol Research on Buddhist monks for mental stress and depression

शोधकर्ताओं ने सुझाया है कि साइकोलॉजिकल डिस्ट्रेस के मामले में ध्यान का अभ्यास उपचार के लिए एक वैकल्पिक तरीका है। इससे चिंता और तनावग्रस्त मरीज बगैर दवा के ठीक हो सकते हैं। हिमाचल के जाने-माने मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक डा. रविचंद्र शर्मा का कहना है कि विदेशी विश्वविद्यालय की ओर से किया यह शोध लोगों के लिए उपयोगी होगा।

आईजीएमसी शिमला के प्रिसिंपल डा. शर्मा ने कहा कि ये बातें लगातार स्थापित हो रही हैं कि योग-प्राणायाम से मानसिक तनाव कम किया जा सकता है। मस्तिष्क में एक ऑटोनॉमस सिस्टम होता है। इसी से दिल का धड़कना, सांस चलना, पसीना आना जैसी तमाम आंतरिक गतिविधियां स्वचालित रहती हैं। इसी सिस्टम में एक उत्तेजना पैदा करने वाला और दूसरा शांति पैदा करने वाला भाग होता है। इनमें अलग-अलग हारमोन पैदा होते हैं।

उत्तेजना वाला भाग तब गलत तरीके से अति सक्रिय होता है, जब दिनचर्या में नकारात्मक दबाव हो। इसके मानसिक तनाव होता है। योग और ध्यान से इस भाग की अति सक्रियता कम हो सकती है और शांति वाले हिस्से को सक्रिय किया जा सकता है। बौद्ध भिक्षुओं की दिनचर्या ही ऐसी होती है कि उनका शांति पैदा करने वाला हिस्सा ज्यादा सक्रिय रहता है। इसलिए वे कम तनावग्रस्त होते हैं।

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