एपीएमसी शिमला-किन्नौर को एक साल में दो करोड़ की चपत
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एपीएमसी शिमला-किन्नौर को एक साल में दो करोड़ की चपत लगी है। पूर्व सरकार के के समय एपीएमसी के शोघी बैरियर को जिला सोलन के परवाणू में लगा दिया था। इसके बाद से मार्केट फीस के रूप में जुटाई जा रही राशि सोलन एपीएमसी के खजाने में जाने लगी थी।
एपीएमसी शिमला और किन्नौर को शोघी बैरियर मार्केट फीस के रूप में हर साल करीब दो करोड़ की राशि वसूल करता था। वहीं, शोघी से बैरियर परवाणू ले जाने से मार्केट फीस के रूप में साल में सिर्फ 43 लाख की राशि ही जुटाई जा सकी है। यानी एक बात साफ है कि एपीएमसी के बैरियर को परवाणू ले जाने से शिमला- किन्नौर एपीएमसी को आर्थिक चपत लगी है।
अब शनिवार से शिमला और किन्नौर एपीएमसी ने अपना बैरियर शोघी पास लगा दिया है। इस तरीके से अब पुन: बैरियर लगाकर सेब की प्रति पेटी पर तीन रुपये का शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है। एपीएमसी को प्रदेश में हर साल मार्केट फीस के रूप में करीब 16 से 17 करोड़ की राशि जमा होती है। इस वसूली के बाद से बागवानों के लिए परेशानी भी खड़ी हो गई है।
मार्केट फीस वसूली के लिए बैरियर लगाने से बागवान परेशान
थानाधार के बागवान बृज लाल, कोटगढ़ के सतपाल, हरि मोहन, नारकंडा के नंद कुमार का कहना है कि बागवानों से प्रति सेब की पेटी तीन रुपये मार्केट फीस लेना गलत है। सरकार फीस लेनी बंद करे।
यह फीस व्यापारियों से ली जाए, जो सेब खरीद कर ले जाते हैं। हिमाचल प्रदेश फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि बागवानों से सेब की प्रति पेटी तीन रुपये की फीस वसूली जा रही है, जो कि बागवानों के साथ अन्याय है।
क्या कहते हैं एपीएमसी अध्यक्ष नरेश शर्मा
एपीएसी शिमला और किन्नौर ने फैसला लिया है कि क्यू फार्म के साथ माल नहीं ले जाने वाले व्यापारियों पर नकेल कसी जाएगी। ऐसे व्यापारियों को अगर रंगे हाथों मार्केट फीस की चोरी करते हुए पकड़ा जाता है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
एपीएमसी शिमला और किन्नौर अध्यक्ष नरेश शर्मा का कहना है कि यह मार्केट फीस व्यापारियों ही ली जा रही है। अगर कोई व्यापारी मार्केट फीस की चोरी करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे दोषी व्यापारियों से जुर्माने के तौर पर पांच गुणा ज्यादा राशि वसूली जाएगी।