पानी पर आईपीएच, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आमने सामने, मांगी आपराधिक मुकदमे चलाने की मंजूरी
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राजधानी शिमला के लोगों के लिए पीने का स्वच्छ पानी न दे पाने के मामले में आईपीएच महकमा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आमने-सामने हो गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के नमूने फेल होने के बाद आईपीएच महकमे के अफ सरों पर आपराधिक मुकदमे चलाने की मंजूरी मांगी तो इस पर तनातनी की स्थिति पैदा हो गई।
आईपीएच विभाग ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से विभाग के साथ संयुक्त नमूने लेने के बाद ही इस पर फैसला करने की बात की है। हाल ही में लिए संयुक्त नमूनों की अब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिमला के छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से नमूने एकत्र किए तो इनमें से कई फेल हो गए।
इन प्लांटों का पानी साफ कर इसे जलस्रोतों में मिलने दिया जाता है। नमूने फेल होने की स्थिति में इन प्लांटों के निचले पेयजल, सिंचाई और अन्य स्रोतों को गए पानी के साफ नहीं होने से यह नुकसानदेह साबित हो सकता है।
इससे पानी का इस्तेमाल करने वाले लोगों को पीलिया जैसे जलजनित रोगों का शिकार होना पड़ता है। सूत्रों ने बताया कि इन नमूनों के फेल होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिमला के लिए पेयजल आपूर्ति करने वाली संस्था ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एंड सीवरेज सर्कल (जीएसडब्ल्यूएसएससी) के कुछ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की बात की है।
इसके लिए सरकार से मुकदमे की मंजूरी मांगी है, मगर आईपीएच महकमा इनके बचाव में आ गया है। इन्हीं प्लांटोें से विभाग की ओर से लिए गए सैंपल पास हो गए थे, पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लिए गए नमूने फेल हुए हैं। राज्य सरकार के आईपीएच महकमे के एक अधिकारी ने बताया कि संयुक्त रूप से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उसी के बाद आगामी कार्रवाई की बात होगी।