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इस समुदाय को मिलने वाला है एसटी दर्जा, जल्द होगी घोषणा

Mon, 13 Feb 2017 12:14 AM IST
संजय भारद्वाज/अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
संजय भारद्वाज/अमर उजाला, नाहन (सिरमौर) Updated Mon, 13 Feb 2017 12:14 AM IST
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Tribal status to hati community by govt of india

सिरमौर जनपद के समूचे गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा मिलने की उम्मीद प्रबल हो गई है। राज्य सरकार की संस्तुति के बाद केंद्र सरकार ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने मामला रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (आरजीआई) को भेजा है। आरजीआई की रिपोर्ट के बाद गिरिपार को जनजातीय घोषित करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। 

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जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने शिमला के सांसद वीरेंद्र कश्यप को पत्र भेजकर मामले की प्रक्रिया से अवगत करवाया है। ‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे को अभियान के रूप में उठाया है। हाटी समुदाय के संघर्ष और ‘अमर उजाला’ की पहल रंग लाने लगी है।गिरिपार क्षेत्र की 127 पंचायतों में करीब पौने तीन लाख आबादी हाटी समुदाय की है। उत्तराखंड का जोनसार बाबर क्षेत्र 1933 तक सिरमौर रियासत का ही एक भाग था। 1967 में भारत सरकार ने इसे जनजातीय क्षेत्र घोषित किया। 
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तमाम समानताओं और संघर्ष के बावजूद गिरिपार क्षेत्र के लोगों को जनजातीय दर्जा नहीं मिला। दिसंबर में केंद्रीय हाटी समिति के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद वीरेंद्र कश्यप की अगुवाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, जनजातीय कार्यमंत्री जुएल ओराम और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया से मुलाकात कर यह मामला उठाया था। 
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सांसद को लिखे पत्र में जनजातीय कार्यमंत्री ने कहा है कि हिमाचल सरकार ने हाटी समुदाय को एसटी क्षेत्र में शामिल करने की संस्तुति आरजीआई को भेजी है। 30 दिसंबर को रिमांइडर भी भेजा है। आरजीआई की प्रतिक्रिया का इंतजार है। इसके पश्चात अगली प्रक्रिया होगी। सांसद वीरेंद्र कश्यप ने बताया कि वह स्वयं मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। केंद्र से लगातार संपर्क में है। एसटी दर्जे की मांग जल्द पूरा होने की उम्मीद है। 

क्या है पूरी प्रक्रिया
ट्रांसगिरि को जनजातीय घोषित करने की प्रक्रिया पर केंद्रीय हाटी समिति के महासचिव कुंदन शास्त्री ने बताया कि आरजीआई की हां की देरी है। इसके बाद मामला गृह मंत्रालय के पास जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में विधेयक लाया जाएगा। आरजीआई से अनुमति के बाद आगे की प्रक्रिया आसान होती है। यह संघर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 


क्या है जनजातीय दर्ज के आधार 
लोकुर कमीशन के अनुसार एसटी दर्जे के लिए पांच आधार माने गए हैं। इनमें इलाके की अलग परंपराएं, अलग लोक संस्कृति, शाइनेस, भौगोलिक परिस्थिति और सामाजिक आर्थिक पिछड़ापन शामिल हैं। कुंदन शास्त्री के अनुसार ये पांचों आधार ट्रांसगिरि में मौजूद हैं। 

यह होगा दर्जा मिलने का फायदा
- गिरिपार के युवाओं को सरकारी नौकरियों मेें आरक्षण मिलेगा, रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
- केंद्र सरकार से विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त आर्थिक मदद मिलेगी।
- लुप्त होती जा रही हाटी लोक संस्कृति को नई पहचान मिलेगी।
- क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों में शिक्षा लेने के लिए आर्थिक मदद मिलेगी।

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