सेब पर नहीं कर पाएंगे इस ऑयल का छिड़काव, जानिए क्या है वजह
हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों के लिए बुरी खबर है। केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण परिषद ने ऐसा निर्णय लिया है जिससे बागवानों में निराशा है। सेब के बगीचों में ट्री स्प्रे ऑयल का फिलहाल इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
इसके इस्तेमाल के लिए केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण परिषद ने मंजूरी नहीं दी है। इस बार भी तेल कं पनियां इसका पंजीकरण नहीं करवा पाई हैं।इससे बागवानों में निराशा है। ट्री स्प्रे ऑयल का इस्तेमाल सेब के पेड़ों में फं गस रोकने के लिए किया जाता है।
राज्य में जबसे बागवानी शुरू हुई है, तभी से सेब के पेड़ों पर फंगस को रोकने के लिए कई प्रकार के छिड़काव किए जाते हैं। कुछ दशकों से बागवान ट्री स्प्रे ऑयल (टीएसओ) का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि इसका छिड़काव केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं रजिस्ट्र्रेशन काउंसिल मंजूरी के बगैर गैर कानूनी है।
इसकी वजह इसके छिड़काव से मानव, पशु, अन्य जीवों, वनस्पति, जल स्रोतों और पर्यावरण पर होने वाले प्रतिकूल असर का सही असर का सही-सही आकलन का न होना है।
दरअसल किसी भी रसायन का पेड़-पौधों पर तब तक छिड़काव नहीं किया जा सकता है, जब तक इस पर केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड ने प्रयोग कर ये प्रमाणित न किया हो कि इसका इन सब पर एक मात्रा से ज्यादा प्रतिकूल असर नहीं होगा।
सूत्रों ने बताया कि इस तेल को तैयार करने वाली कुछ कंपनियों ने इस पर प्रयोग और इसके पंजीकरण के लिए केंद्रीय बोर्ड और परिषद के पास आवेदन किया है, मगर वहां से हरी झंडी नहीं मिली है।
हिमाचल प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान का कहना है कि ट्री स्प्रे ऑयल का जल्दी पंजीकरण किया जाना चाहिए। जहां तक बागवान मानते हैं कि ये कोई तीखा जहर नहीं है। सेब के पेड़ों को होने वाले नुकसान को देखते हुए इसका पंजीकरण किया जाना चाहिए।