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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Tranda Devi temple at Kinnaur.

ऐसा मंदिर जहां माथा टेके बिना आगे नहीं बढ़ा सकते गाड़ी

Fri, 01 Nov 2019 06:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुरजीत नेगी, अमर उजाला, भावानगर (किन्नौर)
सुरजीत नेगी, अमर उजाला, भावानगर (किन्नौर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 01 Nov 2019 06:13 PM IST
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Tranda Devi temple at Kinnaur.
मां तरंडा का मंदिर - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल के किन्नौर जिले में एनएच-5 के किनारे निगुलसरी में मां तरंडा का मंदिर है। यहां से वाहन में गुजरने वाला हर शख्स मंदिर में शीश झुकाना नहीं भूलता। अगर कोई अंजान भी इस रास्ते से गुजरता है तो उसे बताया जाता है कि इस मंदिर में माथा टेककर जाए। 

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लोगों का मानना है कि अगर कोई वाहन चालक इस मंदिर में माथा टेके बिना गुजर जाता है तो उसके साथ अनहोनी हो जाती है। वह वापस नहीं लौट पाता। यह मंदिर रामपुर से करीब 44 किमी की दूरी पर नेशनल हाईवे के किनारे बना है। 
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तरंडा माता मंदिर का इतिहास भी रोचक है। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद सेना ने यहां से सड़क बनाने की सोची ताकि बॉर्डर तक गोला बारूद और रसद आसानी से पहुंचाया जा सके। 

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रोचक है मंदिर के स्थापना की कहानी

Tranda Devi temple at Kinnaur.

1963 में सेना के बीआरओ के ग्रेफ विंग ने यहां सड़क बनाने का काम शुरू किया। सड़क बनाते समय रोजाना चट्टानें गिरने से किसी न किसी मजदूर की मौत हो जाए। सेना के लोग इससे काफी परेशान हो गए।

इस बीच तरंडा गांव के लोगों ने उन्हें गांव में बने मां चंद्रलेखा के मंदिर में जाने को कहा। देवी के गूर ने बताया कि जिस जगह से आप सड़क निकाल रहे हैं वहां शक्ति का वास है। देवी वहां स्थापित होना चाहती हूं। 

इसके बाद सेना के लोगों ने यहां मंदिर का निर्माण करवाया और तरंडा गांव से मां की मूर्ति को लाकर यहां स्थापित किया। 1965 में मां का मंदिर बनने के बाद सड़क का काम भी पूरा हो गया और कोई हादसा भी नहीं हुआ। इसके बाद से मान्यता पड़ गई कि जो भी इस मंदिर में शीश नवाकर जाएगा उसके साथ कोई अनहोनी नहीं होगी। 

सेना के जवान ही यहां संभालते हैं पूजा पाठ का काम

Tranda Devi temple at Kinnaur.
निगुलसरी के तरंडा गांव में मां चंद्रलेखा का रथ अभी भी है। यहां भी माता का प्राचीन मंदिर है। त्योहारों पर मां चंद्रलेखा के रथ के लोग दर्शन करते हैं। मां इलाके के लोगों के कष्टों का निवारण करती हैं।

तरंडा मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष चंपे लाल नेगी ने बताया कि उन्हें भी बुजुर्गों से इस बारे में पता चला था। एनएच-5 के किनारे इस मंदिर की देखरेख अब सेना ही करती है। सेना के जवान ही यहां पूजा पाठ का काम संभालते हैं।
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