Solan News: बारिश के कारण सोलन में टमाटर पड़ा काला, गिरे दाम, आढ़ती भी करने लगे आनाकानी
बारिश के बाद टमाटर खराब होना शुरू हो गया है। टमाटर में पानी भर गया है, जिस कारण वह काला पड़ने के साथ फटना शुरू हो गया है। इस कारण इसके दामों में भी गिरावट आई है।
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सब्जी मंडी में सोलन 100 से 128 रुपये प्रति किलो बिक रहे टमाटर के दाम गिर गए हैं। शनिवार को टमाटर के थोक भाव 17 से 71 रुपये प्रति किलो रहे। इसका मुख्य कारण अधिक बारिश से टमाटर का काला पड़ना है। वहीं पानी भरने के कारण टमाटर फट भी रहा है। बाहरी राज्यों के कारोबारी काले और फटे टमाटर की खरीदारी करने के लिए आनाकानी कर रहे हैं। हालांकि अच्छे ग्रेड की हिमसोना टमाटर किस्म का एक क्रेट 2400 रुपये तक भी बिका है। वहीं मौसम साफ होने पर मंडी में टमाटर की आवक भी बढ़ गई है। शनिवार को 5000 क्रेट सब्जी मंडी सोलन पहुंचे हैं।
जानकारी के अनुसार सब्जी मंडी सोलन में तीन दिन से बारिश न होने से राहत मिली है। लेकिन बारिश के बाद टमाटर खराब होना शुरू हो गया है। टमाटर में पानी भर गया है, जिस कारण वह काला पड़ने के साथ फटना शुरू हो गया है। इस कारण इसके दामों में भी गिरावट आई है। जिले सोलन का टमाटर काफी समय चलता है, लेकिन बारिश के कारण यह दिल्ली तक भी नहीं पहुंच पा रहा है। टमाटर दो दिन भी खराब हो रहा है।
जबकि इससे पहले सोलन का टमाटर तुड़ाई के बाद एक सप्ताह तक भी आसानी से टिक जाता था। एक क्रेट में आधे से ज्यादा टमाटर खराब निकल रहे है। इससे किसान समेत कारोबारी भी परेशान हो गए हैं। अच्छे दाम मिलने के बाद अब किसानों के पास अच्छी क्वालिटी का टमाटर ही नहीं है। उधर, सब्जी मंडी सोलन के आढ़ती आशु ठाकुर ने बताया कि टमाटर के दाम स्थिर हैं, लेकिन पहले की तरह अच्छी क्वालिटी का टमाटर मंडी में बहुत कम पहुंच रहा है। सब्जी मंडी सोलन के सचिव डॉ. रविंद्र शर्मा ने बताया कि खराब टमाटर आने के कारण दामों में भी गिरावट आई है। अच्छी क्वालिटी वाले टमाटर के दाम स्थिर हैं। किसानों को ग्रेड के हिसाब से दाम मिल रहे हैं।
खराब टमाटर के वसूले जा रहे अधिक दाम
जिला सोलन में कई सब्जी कारोबारी आम जनता के साथ सरेआम लूट कर रहे हैं। सब्जियों के बाजार में दो गुना से अधिक दाम वसूल किए जा रहे हैं। शहर के कई सब्जी विक्रेता कम गुणवत्ता वाला टमाटर खरीद रहे हैं, लेकिन लोगों से इसके दाम हिमसोना किस्म के टमाटर के हिसाब से वसूले जा रहे हैं। लेकिन इस पर विभाग की ओर से कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है।