धर्मशाला: तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को मिला शांति के लिए गोल्ड मर्करी पुरस्कार
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को शांति, करुणा, शिक्षा और मानवाधिकारों के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता के सम्मान में शांति के लिए गोल्ड मर्करी पुरस्कार प्रदान किया।
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तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को शांति और स्थिरता 2025 के लिए गोल्ड मर्करी अवार्ड प्रदान किया गया। धर्मशाला स्थित आवास पर गोल्ड मर्करी इंटरनेशनल संस्था के अध्यक्ष एवं महासचिव निकोलस डी सेंटिस ने दलाई लामा को यह अवार्ड प्रदान करते हुए कहा कि अवार्ड प्रदान करना हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। निकोलस डी सेंटिस ने कहा कि आप एक ऐसे नेता हैं जिनकी बुद्धिमत्ता, करुणा और शांति के प्रति अटूट समर्पण ने दुनिया को प्रेरित किया है। हम आपकी असाधारण विरासत पर विचार करते हैं। दशकों से आपने अहिंसा, मानवीय गरिमा, अंतर-धार्मिक संवाद और पर्यावरण संरक्षण का बीड़ा उठाया है। दलाई लामा हमें याद दिलाते हुए कि सच्ची शांति भीतर से शुरू होती है।
तिब्बत मुद्दे को सुलझाने के लिए चीन में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी: दलाई लामा
तिब्बती धर्मगुरु 14वें दलाई लामा ने अपनी नई किताब में कहा है कि तिब्बत मुद्दे को सुलझाने के लिए चीनी नेतृत्व में साहस और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। दलाई लामा की नवीनतम पुस्तक, वॉयस फॉर द वॉइसलेस इस महीने की शुरुआत में विमोचन हुआ है। पुस्तक में उन्होंने कहा कि दो शृंखलाओं (1979-1989 और 2002-2010) के बावजूद, बीजिंग हू याओबांग (चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व महासचिव) की ओर से प्रस्तुत पांच बिंदुओं से आगे नहीं बढ़ा, जो सभी दलाई लामा की स्थिति से संबंधित थे। दलाई लामा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बीजिंग ने तिब्बत मुद्दे को पारस्परिक रूप से लाभकारी तरीके से हल करने के लिए उनकी ओर से दिए गए अवसरों का लाभ नहीं उठाया। पुस्तक के एक अंश में लिखा है कि हालांकि एक समय पर तिब्बत के मुद्दे को बातचीत के माध्यम से हल करने की वास्तविक इच्छा और चाहत रही होगी लेकिन चीनी नेतृत्व की ओर से ऐसा करने के लिए न तो साहस था और न ही आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति रही।
जिला मुख्यालय कांगड़ा के धर्मशाला में 17वीं निर्वासित तिब्बती संसद का बजट सत्र सोमवार को स्पीकर खेंपो सोनम तेनफेल की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें प्रमुख विधायी संशोधन और प्रस्ताव पारित किए गए। नौवें सत्र के अंतिम दिन की शुरुआत पीएसी के सदस्य सांसद तेनजिन चोएजिन की ओर से 12वीं लोक लेखा समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ हुई। इसके बाद 12वीं पीएसी की रिपोर्ट पर बहस के लिए एक प्रस्ताव रखा गया, जिसे सांसद जुचेन कोंचोक चोएडोन ने पेश किया और सांसद त्सानेत्सांग धोंडुप ताशी ने इसका समर्थन किया। सत्र विधायी प्रक्रिया के तीसरे वाचन और निम्नलिखित नियमों और विनियमों को अपनाने के साथ आगे बढ़ा।