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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Three big challenges in front of new PM Pempa Sering Of Tibet

विश्लेषण: तिब्बत के नए पीएम पेंपा सेरिंग के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

Sat, 15 May 2021 10:35 AM IST
Krishan Singh सुनील चड्ढा, अमर उजाला,धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला,धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 15 May 2021 10:35 AM IST
सार

निर्वासित तिब्बत सरकार के नए प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि वह धर्मगुरु दलाईलामा की मध्य मार्ग नीति को आगे बढ़ाएंगे।

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Three big challenges in front of new PM Pempa Sering Of Tibet
तिब्बत के नए पीएम पेंपा सेरिंग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले 60 साल से किसी दूसरे देश में लोकतांत्रिक रूप से चल रही निर्वासित तिब्बत सरकार के नए प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग के सामने तीन बड़ी चुनौतियां होंगी। इनमें चीन सरकार के साथ रुकी हुई बातचीत का सिलसिला शुरू कर तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा की मध्य मार्ग नीति को आगे बढ़ाना और नई बाइडन सरकार सहित यूएन से तिब्बत मुद्दे को जोरशोर से उठाना मुख्य होगा। तिब्बत मुद्दे को लेकर भारत सरकार के नेतृत्व से और गहरा संवाद बनाकर राजनीतिक और कूटनीतिक विश्वास हासिल करना भी सेरिंग के लिए बड़ी चुनौती रहेगा।

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लद्दाख की गलवां घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसा के बाद कई तिब्बती स्वयंसेवी संस्थाएं और युवा तिब्बत की आजादी का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं। दलाईलामा की तिब्बत की स्वायत्ता की मांग के बीच अब तिब्बत की आजादी की हवा में सामंजस्य बैठाना भी पेंपा सेरिंग के समक्ष बड़ी चुनौती है। हालांकि, अमेरिका ने पिछले वर्ष अपनी संसद में तिब्बतियन नीति एवं समर्थन अधिनियम 2020 पास कर चीन को बड़ा झटका देकर तिब्बती मुद्दे को बड़ी संजीवनी दी थी। 
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चीन सरकार के साथ शुरू करेंगे बातचीत : सेरिंग
निर्वासित तिब्बत सरकार के नए प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि वह धर्मगुरु दलाईलामा की मध्य मार्ग नीति को आगे बढ़ाएंगे। चीन सरकार के साथ रुकी हुई बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ाने और धर्मगुरु दलाईलामा की तिब्बत जाने की इच्छा पूरी करने का प्रयास करेंगे। अमेरिका के साथ संवाद और ज्यादा गहरा किया जाएगा। भारतीय लोगों की भावनाएं चीन के विरोध में हैं। वह चाहते हैं कि भारत तिब्बत पर अपनी स्थिति और ज्यादा मजबूत करे। तिब्बत मुद्दे पर भारत के नेताओं के साथ मिलकर व उनकी सलाह लेकर एकजुट होकर काम करेंगे।  
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तिब्बत के प्रति रुख में आई है कमी : नायर
तिब्बत मुद्दे पर कई शोध पत्र लिख चुके केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश में पत्रकारिता विभाग के डीन प्रदीप नायर कहते हैं कि अमेरिका के अलावा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रुख में तिब्बत मुद्दे के प्रति कमी आई है। इस पर ध्यान देना होगा। भारत सरकार का उत्साह भी कुछ समय से तिब्बत के प्रति कम हुआ है। नए नेतृत्व को भारत सरकार से राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन लेना होगा। यूएन में तिब्बत मुद्दे को किस तरह उठाया जाता है, यह नए नेतृत्व के समक्ष बड़ी चुनौती है। 


भारत उठाए तिब्बतियों की आवाज : आशिमा
तिब्बत मुद्दे पर स्वतंत्र लेख लिखने वाली अंतर्राष्ट्रीय लेखिका आशिमा कौल कहती हैं कि निर्वासित तिब्बत सरकार के लोकतांत्रिक चुनाव चीन सरकार के मुंह पर तमाचा हैं। लोकतंत्र की इस आवाज से चीन को डरना चाहिए। भारत को तिब्बत के भीतर और निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों के लिए आवाज उठानी चाहिए।

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