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कोरोना वायरस की सरंचना को समझना होगा आसान, दवा बनाने में मिलेगी मदद, आईआईटी मंडी का दावा
Mon, 10 Aug 2020 09:44 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 10 Aug 2020 09:44 PM IST
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कोरोना वायरस की जांच
- फोटो : अमर उजाला
वैश्विक महामारी कोविड-19 वायरस की सरंचना को समझना अब आसान होगा। इससे शोध टीमों को कोविड-19 की स्टीक दवा या वैक्सीन तैयार करने में मदद मिल सकेगी। आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं की टीम ने वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा अमेरिका के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर यह कामयाबी हासिल की है। संयुक्त शोध में कंप्यूटेशन टूल्स के उपयोग से वायरस प्रोटीयोम के महत्वपूर्ण अंश इंट्रिंसिकली डिजार्डर्ड प्रोटीन रीजंस (आईडीपीआर) की समझ विकसित की गई है।
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इस साझा शोध में पता चला है कि प्रोटीयोम वही समूह है जो कोविड 19 के वायरस में जानलेवा विषैला प्रोटीन बनाता है। आईआईटी मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजनीश गिरी ने इस शोध का नेतृत्व किया है। शोध को सेल्युलर एंड मोलेक्युलर लाइफ साइंसेज नामक जर्नल ने प्रकाशित भी किया है। इस शोध पत्र को तानिया भारद्वाज, मीनाक्षी शेगाने, भुवनेश्वरी आर. गेही, प्रतीक कुमार और कौंडिक गढ़ावे और अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. क्रिस्टोफर जे. ओल्ड फील्ड, वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी और डॉ. व्लादीमीर एन. उवर्स्की, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा ने तैयार किया है।
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यह है कोविड 19 वायरस
कोविड 19 वायरस मुख्यत: जेनेटिक मोलेक्यूल आरएनए का बना है, जो लिपिड और प्रोटीन के घेरे में बंद है। मनुष्य के शरीर में पहुंचने के बाद वायरस प्रतिरक्षा तंत्र को भेद देता है और अपना आरएनए मनुष्य के सेल्स के अंदर डाल देता है। जिससे कई शारीरिक समस्याएं और लक्षण पैदा होते हैं।
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वैज्ञानिकों के लिए शोध होगा फायदेमंद
डॉ. गिरी के अनुसार तर्कसंगत दवा संरचना की प्रक्रिया फिलहाल सीमित है। इसकी वजह साफ है। यह अधिकतर टारगेट प्रोटीन में इंट्रिसिक डिजॉर्डर की मौजूदगी का पता नहीं चलता। कोविड 19 प्रोटीयम में इन क्षेत्रों की संरचना समझना संरचनात्क जीव वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण होगा, जो दवा विकास के लिए हाई थ्रुपुट और संरचना-आधारित स्क्रीनिंग में जुटे रहते हैं।