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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   The state govt justified the Himachal religious freedom law, the hearing of the case was fixed on January 10.

हिमाचल: धार्मिक स्वतंत्रता कानून को राज्य सरकार ने ठहराया उचित, मामले की सुनवाई 10 जनवरी निर्धारित

Fri, 16 Dec 2022 09:39 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 16 Dec 2022 09:39 PM IST
सार

धार्मिक स्वतंत्रता कानून को चुनौती देने वाले मामले में सरकार ने अपना जवाब दायर किया है। सरकार की ओर से इस कानून को सही ठहराया गया। जवाब के माध्यम से याचिकाकर्ता के सभी आरोपों को निराधार बताया गया। 

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The state govt justified the Himachal religious freedom law, the hearing of the case was fixed on January 10.
प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल धार्मिक स्वतंत्रता कानून को चुनौती देने वाले मामले में सरकार ने अपना जवाब दायर किया है। सरकार की ओर से इस कानून को सही ठहराया गया। जवाब के माध्यम से याचिकाकर्ता के सभी आरोपों को निराधार बताया गया। प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई आगामी 10 जनवरी 2023 को निर्धारित की है। हिमाचल धार्मिक स्वतंत्रता कानून अधिनियम 2019 के प्रावधानों को अदालत में चुनौती दी गई है। आरोप लगाया गया है कि इस अधिनियम के प्रावधान भारतीय संविधान के विरोधाभासी हैं। ये प्रावधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि अभी तक प्रदेश में इस अधिनियम में एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है। ऐसी सूरत में कानूनी प्रावधानों को और सख्त बनाना कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। 

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बता दें कि भाजपा सरकार ने मानसून सत्र के आखिरी दिन प्रदेश में धर्मांतरण संशोधन विधेयक को सदन में पारित किया था। अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित वर्ग के लोग अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनको किसी तरह का आरक्षण नहीं देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अगर वे धर्म परिवर्तन की बात छिपाकर आरक्षण की सुविधाएं लेते हैं तो ऐसे में उन्हें तीन से पांच साल तक सजा और 50 हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना होगा। संशोधित कानून के मसौदे के मुताबिक किसी व्यक्ति की ओर से अन्य धर्म में विवाह करने और ऐसे विवाह के समय अपने मूल धर्म को छिपाने की स्थिति में भी तीन से 10 साल तक के कारावास का प्रावधान होगा। कानून में दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

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