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Shimla News: जॉब ट्रेनी पॉलिसी को तुरंत वापस ले प्रदेश सरकार
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फागली और आरकेएमवी में प्रदर्शन कर एबीवीपी ने दिया अल्टीमेटम, बोले-यह बेरोजगारों से भद्दा मजाक
पूछा गया है कांग्रेस का एक लाख नौकरियां देने का वादा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश सरकार की सरकारी विभागों में नियुक्ति और नियमितिकरण के लिए जॉब ट्रेनी की पॉलिसी का विरोध कर रही एबीवीपी ने वीरवार को संस्कृत महाविद्यालय फागली और राजकीय कन्या महाविद्यालय (आरकेएमवी) में प्रदर्शन किए।
एबीवीपी ने कहा कि इस नीति को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके विरोध में प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा। संस्कृत महाविद्यालय में हुए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और संगठन के इकाई पदाधिकारियों ने सरकार की इस पॉलिसी को बेरोजगार युवाओं के साथ छल करार दिया। एबीवीपी के फागली इकाई के अध्यक्ष चैतन्य शर्मा और सचिव सक्षम ने कहा कि यह युवाओं को सस्ती श्रम शक्ति के रूप में उपयोग करने की एक साजिश है। इससे न तो उनके कौशल में वृद्धि होगी और न ही उनका कोई स्थायी कॅरिअर बनेगा। इसके स्थान पर यदि सरकार नियमित पदों पर भर्ती करती या पहले से लटकी भर्तियों को पूरा करती तो युवाओं को लाभ मिल सकता था। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा, रोजगार और युवा हितों के विरुद्ध नीतियां ला रही है।
छात्रों को प्रशिक्षण देना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कम वेतन पर उन्हें अस्थायी नौकरियों में झोंक दिया जाए। यह नीति युवाओं के भविष्य के साथ धोखा है। एबीवीपी इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की आरकेएमवी इकाई की इकाई अध्यक्ष सानिया शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सत्ता में आने से पहले एक लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया था। इसे सरकार अभी तक पूरा नहीं कर पाई है, अब जॉब ट्रेनी जैसे शोषण वाली नीति ले आई है। प्रदेश सरकार की इस नीति में दो साल तक युवा टेस्ट पास करने के बाद केवल ट्रेनिंग पर रहेंगे। इस दौरान सीएसएस, सीसीएस, लीव और पेंशन सहित कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसके बाद नियमित होने के लिए फिर से टेस्ट पास करना होगा, यह युवाओं के साथ अन्याय होगा।
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पूछा गया है कांग्रेस का एक लाख नौकरियां देने का वादा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश सरकार की सरकारी विभागों में नियुक्ति और नियमितिकरण के लिए जॉब ट्रेनी की पॉलिसी का विरोध कर रही एबीवीपी ने वीरवार को संस्कृत महाविद्यालय फागली और राजकीय कन्या महाविद्यालय (आरकेएमवी) में प्रदर्शन किए।
एबीवीपी ने कहा कि इस नीति को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके विरोध में प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा। संस्कृत महाविद्यालय में हुए प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं और संगठन के इकाई पदाधिकारियों ने सरकार की इस पॉलिसी को बेरोजगार युवाओं के साथ छल करार दिया। एबीवीपी के फागली इकाई के अध्यक्ष चैतन्य शर्मा और सचिव सक्षम ने कहा कि यह युवाओं को सस्ती श्रम शक्ति के रूप में उपयोग करने की एक साजिश है। इससे न तो उनके कौशल में वृद्धि होगी और न ही उनका कोई स्थायी कॅरिअर बनेगा। इसके स्थान पर यदि सरकार नियमित पदों पर भर्ती करती या पहले से लटकी भर्तियों को पूरा करती तो युवाओं को लाभ मिल सकता था। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा, रोजगार और युवा हितों के विरुद्ध नीतियां ला रही है।
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छात्रों को प्रशिक्षण देना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कम वेतन पर उन्हें अस्थायी नौकरियों में झोंक दिया जाए। यह नीति युवाओं के भविष्य के साथ धोखा है। एबीवीपी इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की आरकेएमवी इकाई की इकाई अध्यक्ष सानिया शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सत्ता में आने से पहले एक लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया था। इसे सरकार अभी तक पूरा नहीं कर पाई है, अब जॉब ट्रेनी जैसे शोषण वाली नीति ले आई है। प्रदेश सरकार की इस नीति में दो साल तक युवा टेस्ट पास करने के बाद केवल ट्रेनिंग पर रहेंगे। इस दौरान सीएसएस, सीसीएस, लीव और पेंशन सहित कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसके बाद नियमित होने के लिए फिर से टेस्ट पास करना होगा, यह युवाओं के साथ अन्याय होगा।
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