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हिमाचल: कैप्टन राम सिंह की धुनों ने भरा था जवानों में जोश
Sun, 15 Aug 2021 12:20 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 15 Aug 2021 12:20 PM IST
सार
राम सिंह 1922 में 14 साल की उम्र में गोरखा ब्वॉय कंपनी में भर्ती हुए। ब्रिटिश सेना में सेवाएं देने के बाद वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में आ गए। द्वितीय विश्वयुद्ध में अपनी वीरता का प्रदर्शन कर कई मेडल उन्होंने जीते।
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स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन राम सिंह ठाकुर(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में खनियारा से संबंध रखने वाले स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन राम सिंह ठाकुर की रविवार को देशभर में जयंती मनाई जा रही है। स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान के साथ-साथ कैप्टन राम सिंह ठाकुर ने कई ऐसे गाने लिखे और कई गानों का संगीत दिया, जो आज भी स्वतंत्रता संग्राम की यादों को जीवंत बना जाते हैं। गुड़गांव में रहने वाले उनके पुत्र रमेश ठाकुर ने बताया कि आजाद हिंद फौज का गठन करके नेताजी सुभाष चंद्र बोस ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अंतिम संघर्ष की तैयारी कर चुके थे।
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नेताजी ब्रिटिश शासन के खिलाफ अब इतनी जोर से प्रहार करना चाहते थे कि वह अंतिम प्रहार साबित होता। तब आजाद हिंद फौज के कैप्टन राम सिंह ठाकुर को ऐसा जोशीला संगीत बनाने के लिए कहागया कि फौज का जोश ठंडा न पड़े। तभी कैप्टन राम सिंह ठाकुर ने ‘कदम कदम बढ़ाए जा...’ जैसे देशभक्ति से सराबोर गीत की धुन बनाई। इसके अलावा उन्होंने भारत के राष्ट्रीय गौरव ‘जन गण मन’ की धुन बनाकर देशभर में विशेष पहचान पाई थी। 15 अगस्त, 1947 को कैप्टन राम सिंह के नेतृत्व में आईएनए (इंडियन नेशनल आर्मी) के आर्केस्ट्रा ने लाल किले पर शुभ सुख चैन की बरखा बरसे...गीत की धुन बजाई।
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गौरतलब है कि 15 अगस्त 1914 को धर्मशाला के चीलगाड़ी में जन्मे राम सिंह का बाल्यकाल धौलाधार की गोद में बसे खनियारा गांव में गुजरा। बचपन में जानवर के सींग से वाद्य यंत्र बनाकर धुन निकालने वाले राम सिंह 1922 में 14 साल की उम्र में गोरखा ब्वॉय कंपनी में भर्ती हुए। ब्रिटिश सेना में सेवाएं देने के बाद वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में आ गए। द्वितीय विश्वयुद्ध में अपनी वीरता का प्रदर्शन कर कई मेडल उन्होंने जीते। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के अनुरोध पर राम सिंह उत्तर प्रदेश में सब इंस्पेक्टर के रूप में लखनऊ आए और पीएसी के बैंड मास्टर बने। 15 अप्रैल, 2002 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
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15 साल बाद भी सरकार नहीं स्थापित कर पाई प्रतिमा
देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कैप्टन राम सिंह ठाकुर के पैतृक गांव खनियारा में उनकी प्रतिमा की स्थापना के लिए 2006 से लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कैप्टन राम सिंह ठाकुर समिति इसके लिए अलग-अलग मंचों से कई बार आवाज उठा चुकी है। समिति के संगठन सचिव विजय भंडारी ने बताया कि प्रदेश सरकार का यह दायित्व बनता है कि कैप्टन राम सिंह ठाकुर के सम्मान में उनकी प्रतिमा स्थापित करके सम्मानित करे। लेकिन आज तक इसकी स्थापना नहीं हो पाई है। सरकार को अब इसके लिए गंभीर होकर प्रयास करने चाहिए।