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Una News: ऊना जिले में गिरते दामों से रुकी खेतों से आलू निकालने की प्रक्रिया

Thu, 27 Apr 2023 09:55 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Published by: Krishan Singh Updated Thu, 27 Apr 2023 09:55 PM IST
सार

किसानों ने पहले आलू को खेतों से निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन मंडियों में उम्मीद से बेहद कम दाम मिलने पर उन्होंने इस प्रक्रिया को रोक दिया है।

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The process of extracting potatoes from the fields stopped due to falling prices in the district
खेतों से तैयार आलू की फसल। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में आलू की चार माह वाली फसल खेतों में तैयार है। किसानों ने पहले आलू को खेतों से निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन मंडियों में उम्मीद से बेहद कम दाम मिलने पर उन्होंने इस प्रक्रिया को रोक दिया है। इस समय एक क्विंटल आलू को करीब 500 रुपये कीमत मिल रही है। किसानों का तर्क है कि इन दामों से फसल पर किया खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा। उन्हें अब दाम थोड़ा बढ़ने की आस है। उसके बाद ही फसल मंडी लेकर जाएंगे। जानकारी के अनुसार जिले में करीब 600 हेक्टेयर जमीन पर आलू की फसल लगाई गई है। 10 अप्रैल तक फसल तैयार हो जाती है। किसानों को आस थी कि फसल को 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक दाम मिल जाएंगे, लेकिन मंडी में फसल को उम्मीद से आधे दाम मिल रहे हैं।

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किसान रविंद्र कुमार, विनोद कुमार, देसराज, मदन लाल, योगराज ने बताया कि आलू की फसल के लिए इस बार मौसम की परिस्थितियां भी प्रतिकूल रहीं। फसल को कीड़े व बीमारी से बचाने के लिए कीटनाशकों व अन्य दवाइयों का लगातार छिड़काव करना पड़ा। इसके अलावा चार महीने में समय-समय पर खाद का छिड़काव और सिंचाई भी करनी पड़ी। फसल की पैदावार अच्छी है। एक कनाल में 12 से 15 क्विंटल आलू निकल रहे हैं। ऐसी पैदावार होने पर अगर मंडी में दाम 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक भी मिल जाएं तो खर्च पूरा होने के साथ थोड़ा लाभ मिलेगा, लेकिन दाम 500 रुपये के आसपास मिल रहे हैं।
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आलू की चार माह वाली फसल की बिजाई नवंबर के अंत और दिसंबर की शुरुआत में होती है। इस फसल को तैयार करने में किसानों को दो माह वाली फसल के मुकाबले अधिक मेहनत करनी पड़ती है। हालांकि, चार माह वाली फसल की पैदावार बेहतर होती है। इस फसल को ज्यादातर बड़े किसान ही उगाते हैं। छोटे किसान इसके स्थान पर गेहूं को तरजीह देते हैं। आलू की फसल किसान ज्यादातर पंजाब की मंडियों में बेचते हैं। वहीं, कुछ किसान दिल्ली का रुख भी करते हैं।
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जिले के मैदानी क्षेत्रों की भूमि आलू की फसल के लिए काफी अनुकूल है। स्वां नदी के आसपास के क्षेत्रों में आलू की अच्छी खासी पैदावार होती है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में किसानों को इस फसल के अच्छे दाम मिलेंगे।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग।

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