हद है! उद्योग के लिए दी जमीन पर बना दिए घर
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हिमाचल में उद्योगों के लिए आवंटित जमीन पर ही कई लोगों ने घर बना लिए हैं। कई प्लॉटों पर वर्षों बाद भी जहां उद्योग नहीं लगे हैं, वहीं कई जगह उद्योगों के नाम पर रिहाइशें बना दी गई हैं। शिमला, सोलन समेत विभिन्न जिलों से सरकार के पास ऐसी शिकायतें पहुंची हैं।
इस मामले पर वीरवार को कैबिनेट की बैठक में भी चर्चा हुई है। इसके बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उद्योग विभाग से तमाम औद्योगिक प्लाटों की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए सरकार उद्योग लगाने के लिए प्लॉट उपलब्ध करवाती है।
आवंटित प्लॉटों पर उद्योगपति को पांच साल के भीतर उद्योग स्थापित करना होता है। उद्योगों के लिए आवंटित भूमि पर कुछ और नहीं बनाया जा सकता। उद्योग के साथ कामगारों के रहने के लिए शेड बनाने को भी सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है।
उद्योग नहीं बना दिए अपने घर
इसके बावजूद प्रदेश के कई क्षेत्रों में लोगों ने उद्योगों के नाम पर जमीन लेकर रिहाइशें बना ली है। हजारों औद्योगिक प्लॉट ऐसे हैं, जहां वर्षों बाद भी उद्योग स्थापित नहीं हो सके हैं। हिमाचल में बाहरी राज्यों के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
इसके लिए उन्हें धारा-118 के तहत सरकार से विशेष अनुमति लेनी होती है। इसकी लंबी प्रक्रिया है। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो ऐसे में कई लोगों ने उद्योग लगाने के नाम पर जमीन लेकर रिहाइशी मकान बना लिए हैं।
उद्योग विभाग के निदेशक राजेंद्र राणा का कहना है कि सरकार के आदेशानुसार विभाग उद्योगों के लिए आवंटित प्लाटों की स्टेटस रिपोर्ट सौंपेगा। अभी तक इस तरह के आदेश नहीं पहुंचे हैं। उद्योग के नाम पर घर बनाने के मामले की जांच की जाएगी।