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Shimla News: स्मार्ट सिटी प्रबंधन से डीपीआर पर खर्चे पैसों का सदन ने मांगा रिकॉर्ड
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अमर उजाला असर...
राजधानी में स्मार्ट सिटी मिशन के पैसों से तैयार सभी प्रोजेक्टों की डीपीआर पर खर्च राशि की अगले सदन में पेश करनी होगी पूरी रिपोर्ट
डक्ट की डीपीआर हुई बेकार; पैसों की बर्बादी की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत मालरोड डक्ट योजना की डीपीआर तैयार करने पर 58 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए थे। इतनी राशि खर्च करने के बावजूद तैयार डीपीआर पर कोई काम नहीं हुआ। ऐसे में डीपीआर पर खर्च की गई राशि बर्बाद हो गई।
नगर निगम सदन में शनिवार को स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने माना कि इस योजना की डीपीआर तैयार की गई थी लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं हुआ। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के महाप्रबंधक एवं नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि इस योजना के अलावा अन्य योजनाओं की डीपीआर के लिए भुगतान नहीं किया गया। हालांकि, पार्षदों ने इस दावे पर सवाल उठाए। अब अगले सदन में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत तैयार सभी योजनाओं की डीपीआर समेत पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। सदन में कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा ने यह मामला उठाया था। उन्होंने आशंका जताई कि जब एक योजना की डीपीआर पर इतनी बड़ी राशि खर्च की गई तो बाकी योजनाओं का क्या हाल होगा। उन्होंने कहा कि करीब 40 ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिन्हें डीपीआर तैयार होने के बाद रद्द कर दिया गया। इन सभी योजनाओं की डीपीआर तैयार करने पर कुल कितनी राशि खर्च हुई, इसका ब्योरा संबंधित विभागों से इकट्ठा कर सदन में पेश किया जाए। पार्षद ने सदन में पेश एजेंडे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई प्रस्तावों को एजेंडे से गायब कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एजेंडा तैयार करने की प्रक्रिया नियमानुसार होनी चाहिए।
लिफ्ट के शेयर के लिए खंगाला जाएगा रिकॉर्ड
पार्षद कमलेश मेहता ने लिफ्ट के शेयर को लेकर सवाल उठाया। निगम प्रशासन ने जवाब दिया कि एचपीटीडीसी ने शेयर देने से इन्कार किया है। पार्षदों ने कहा कि लिफ्ट बनाने के लिए जमीन इसी शर्त पर दी गई थी कि लिफ्ट की कमाई का 30 फीसदी हिस्सा नगर निगम को मिलेगा। अब यह शेयर नहीं मिल रहा है। आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि नगर निगम और एचपीटीडीसी के बीच ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है। हालांकि, निगम अपना रिकॉर्ड खंगालेगा। यदि रिकॉर्ड में ऐसी किसी शर्त से संबंधित दस्तावेज मिलता है तो उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। पार्षद वीरेंद्र ठाकुर ने कहा कि नगर निगम को जन्म-मृत्यु के रंगीन प्रमाण पत्र जारी करने चाहिए। आयुक्त ने कहा कि इसके लिए मशीन महंगी है और इससे निगम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
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राजधानी में स्मार्ट सिटी मिशन के पैसों से तैयार सभी प्रोजेक्टों की डीपीआर पर खर्च राशि की अगले सदन में पेश करनी होगी पूरी रिपोर्ट
डक्ट की डीपीआर हुई बेकार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत मालरोड डक्ट योजना की डीपीआर तैयार करने पर 58 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए थे। इतनी राशि खर्च करने के बावजूद तैयार डीपीआर पर कोई काम नहीं हुआ। ऐसे में डीपीआर पर खर्च की गई राशि बर्बाद हो गई।
नगर निगम सदन में शनिवार को स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने माना कि इस योजना की डीपीआर तैयार की गई थी लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं हुआ। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के महाप्रबंधक एवं नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि इस योजना के अलावा अन्य योजनाओं की डीपीआर के लिए भुगतान नहीं किया गया। हालांकि, पार्षदों ने इस दावे पर सवाल उठाए। अब अगले सदन में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत तैयार सभी योजनाओं की डीपीआर समेत पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। सदन में कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा ने यह मामला उठाया था। उन्होंने आशंका जताई कि जब एक योजना की डीपीआर पर इतनी बड़ी राशि खर्च की गई तो बाकी योजनाओं का क्या हाल होगा। उन्होंने कहा कि करीब 40 ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिन्हें डीपीआर तैयार होने के बाद रद्द कर दिया गया। इन सभी योजनाओं की डीपीआर तैयार करने पर कुल कितनी राशि खर्च हुई, इसका ब्योरा संबंधित विभागों से इकट्ठा कर सदन में पेश किया जाए। पार्षद ने सदन में पेश एजेंडे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई प्रस्तावों को एजेंडे से गायब कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एजेंडा तैयार करने की प्रक्रिया नियमानुसार होनी चाहिए।
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लिफ्ट के शेयर के लिए खंगाला जाएगा रिकॉर्ड
पार्षद कमलेश मेहता ने लिफ्ट के शेयर को लेकर सवाल उठाया। निगम प्रशासन ने जवाब दिया कि एचपीटीडीसी ने शेयर देने से इन्कार किया है। पार्षदों ने कहा कि लिफ्ट बनाने के लिए जमीन इसी शर्त पर दी गई थी कि लिफ्ट की कमाई का 30 फीसदी हिस्सा नगर निगम को मिलेगा। अब यह शेयर नहीं मिल रहा है। आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि नगर निगम और एचपीटीडीसी के बीच ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है। हालांकि, निगम अपना रिकॉर्ड खंगालेगा। यदि रिकॉर्ड में ऐसी किसी शर्त से संबंधित दस्तावेज मिलता है तो उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। पार्षद वीरेंद्र ठाकुर ने कहा कि नगर निगम को जन्म-मृत्यु के रंगीन प्रमाण पत्र जारी करने चाहिए। आयुक्त ने कहा कि इसके लिए मशीन महंगी है और इससे निगम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
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