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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   The High Court stayed the order rejecting the application for change of residence

HP High Court: आवास बदलने के आवेदन को खारिज करने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Wed, 15 Feb 2023 10:45 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 15 Feb 2023 10:45 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने नियमों के विपरीत सरकारी आवास आवंटन करने पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने आवास बदलने के आवेदन को खारिज करने के आदेश पर रोक लगा दी है। 

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The High Court stayed the order rejecting the application for change of residence
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नियमों के विपरीत सरकारी आवास आवंटन करने पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने आवास बदलने के आवेदन को खारिज करने के आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि जिस आवास के लिए याचिकाकर्ता ने बदलने के लिए आवेदन किया था, उस आवास को आवंटित न किया जाए। अदालत ने सामान्य प्रशासन के प्रधान सचिव सहित निदेशक संपत्ति को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता खेम कौशल ने अदालत को बताया कि 17 अगस्त 2022 को उसे टाइप-फोर सरकारी आवास आवंटित किया गया था। यह आवास सुविधाजनक न होने के कारण याचिकाकर्ता ने इसे बदलने के लिए 22 अगस्त को आवेदन किया। निदेशक संपत्ति ने 16 जनवरी 2023 को याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज कर दिया। विभाग ने दलील दी कि एक वर्ष के भीतर सरकारी आवास को बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

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नियमों के विपरीत याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज करने को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई। अदालत को बताया गया कि सरकारी आवास को आवंटित करने के लिए सरकार ने वर्ष 1994 में नियम बनाएं हैं। इन नियमों में नियम 13 में आवास को बदलने का प्रावधान दिया गया है। इसके तहत सरकारी कर्मचारी आवंटित आवास को बदलने के लिए आवेदन कर सकता है। आरोप लगाया गया कि विभाग ने अपने चहेतों को समायोजित करने के लिए मनमाने तरीके से यह शर्त लगाई है। अदालत ने विभाग का यह निर्णय प्रथम दृष्टया सरकारी आवास नियम 1994 के प्रावधानों के विपरीत पाया है। अदालत ने आवास बदलने के आवेदन को खारिज करने के आदेश पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को छूट दी है कि वह दोबारा से आवास बदलने के लिए आवेदन करे। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि विभाग को नियमानुसार दोबारा निर्णय लेने के लिए अदालत का यह आदेश आड़े नहीं आएगा।

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