फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Termite will Eat plastic waste in himachal pradesh now

हिमाचल में अब दीमक चट करेगी प्लास्टिक कचरा

Sat, 20 Mar 2021 02:58 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 20 Mar 2021 02:58 AM IST
सार

  • अब दीमक चट करेगी प्लास्टिक कचरा
  • हिमाचल में दीमक की कई प्रजातियां चिह्नित
  • पालमपुर विश्वविद्यालय समेत कई संस्थान शोध में जुटे

विज्ञापन
Termite will Eat plastic waste in himachal pradesh now
दीमक(सांकेतिक)

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में दीमक की कई प्रजातियां ठोस कचरे को चट करेंगी। इनमें से कुछ तो प्लास्टिक कचरे को भी खा रही हैं। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, पालमपुर विश्वविद्यालय समेत कई संस्थान इस बारे में शोध में जुट गए हैं। इसके लिए दीमक की कई प्रजातियां चिह्नित की गई हैं। उनके पेट का बैक्टीरिया इस कचरे को गलाने में मदद कर रहा है। वैज्ञानिकों के इस प्रयोग की प्रारंभिक अवस्था के सफल होने के बाद इससे संबंधित तकनीक राज्य के कई क्षेत्रों में लागू की जा सकती है।

विज्ञापन


इस संबंध में एक शोध को ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय जर्नल में छापा गया है। इसके अनुसार पृथ्वी की सेटिंग में गिरावट के प्रमुख कारणों में से एक ठोस कचरे का अनुचित निपटान है। ठोस कचरे के पहाड़ हर देश में बढ़ रहे हैं, जिससे ठोस कचरा प्रबंधन पृथ्वी पर लगभग हर जगह एक चुनौती है। कीड़ों की कुछ प्रजातियां कचरे से लिग्निन और सेल्यूलोज को पचाने में सक्षम हैं। इनमें से दीमक सबसे अधिक उपयोगी हैं और ये मैला ढोने वालों के रूप में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। माइक्रोफ्लोरा जो दीमक की आंत में रहते हैं, उनकी अपशिष्ट क्षमता में योगदान करते हैं। दीमक प्रमुख मृदा पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधकों के रूप में कार्य करते हैं और कार्बनिक पदार्थों और समग्रता को तोड़ने और पुनरावृत्ति करने में सक्षम होते हैं। 
विज्ञापन


हालांकि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए दीमक की क्षमता का अभी और पता लगाने की भी जरूरत है। इस शोध में हिमाचल प्रदेश में पाई जाने वाली विभिन्न दीमकों की प्रजातियों और उनकी चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य सक्षम अधिकारियों, शोधकर्ताओं को सुझाव और सिफारिशों के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में दीमक के उपयोग की खोज करके वर्तमान प्रणाली के सुधार की दिशा में काम करना है। वैज्ञानिकों का यह कहना है कि प्रदेश में दीमक की कुछ प्रजातियां प्लास्टिक कचरे का अपघटन करने में सक्षम पाई गई हैं। ये मल्टी लेयर प्लास्टिक को चाटकर गला रही हैं। इन प्रजातियों पर शोध हो रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ये वैज्ञानिक कर रहे शोध 
पालमपुर विश्वविद्यालय के बायलॉजी विभाग की राधिका शर्मा, देव समाज कॉलेज फिरोजपुर की रमणीक कौर, नेहा राणा, चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी हरियाणा की आशा पुनिया आदि ने इस पर अध्ययन किया है। इनके अलावा इस अध्ययन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारी भी सहयोग कर रहे हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed