फार्मेसी कॉलेज में तनाव, धरना-प्रदर्शन के दौरान दो छात्राएं बेहोश
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फार्मेसी कॉलेज के सरकारीकरण को लेकर आयुर्वेद बीफार्मा कॉलेज जोगिंद्रनगर के प्रशिक्षुओं की कांगड़ा के पपरोला में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पुलिस के साथ हुई झड़प ने तूल पकड़ लिया है। जोगिंद्रनगर में प्रशिक्षुओं ने कक्षाओं का बहिष्कार कर नारेबाजी करते हुए कॉलेज गेट को बंद कर संबंधित विभाग और सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। तनावपूर्ण माहौल और प्रशिक्षुओं के गुस्से को लेकर पुलिस प्रशासन ने कड़ा पहरा बैठा दिया। प्रशिक्षुओं का आरोप है कि उन्हें बीते दस सालों से कॉलेज के सरकारीकरण के नाम से ठगा जा रहा है।
हालांकि, मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी कॉलेज को सरकारी दर्जा नहीं मिल पा रहा है। इससे कॉलेज के सैकड़ों प्रशिक्षुओं के भविष्य पर तलवार लटकी हुई है। कहा कि सोसायटी मोड पर चल रहे कॉलेज में अध्यापकों की व्यवस्था तक नहीं है। प्रशिक्षुओं से हजारों रुपये फीस वसूल कर सरकारी खजाने को भरा जा रहा है। स्थानीय नेताओं पर बरसते हुए उन्हें कठघरे में खड़ा किया और मुख्यमंत्री पर घोषणा सिरे न चढ़ाने के लिए उन पर निशाना साधा गया। वीरवार सुबह 11 बजे से शुरू हुआ यह प्रदर्शन दोपहर करीब तीन बजे तक चला।
इस दौरान विभिन्न छात्र संगठनों के पदाधिकारी भी पहुंचे थे। धरने को राजनीतिक रंग देने के लिए पहुंचे बाहरी तत्वों को पुलिस ने खदेड़ा। एहतियात बरतते हुए कॉलेज के मुख्य द्वार पर पुलिस ने पहरा बढ़ा दिया है। यहां अब प्रशिक्षुओं के अलावा किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं है। इस प्रकरण को लेकर कॉलेज प्राचार्य टेक चंद ठाकुर ने पुलिस में लिखित शिकायत देते हुए कॉलेज का माहौल खराब करने वाले बाहरी तत्वों की शिनाख्त कर उन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
करीब पांच घंटे तक चले इस उग्र धरना प्रदर्शन को आखिर कॉलेज प्राचार्य के आश्वासन पर समाप्त कर दिया गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि कॉलेज के सरकारीकरण पर संबंधित विभाग और सरकार बेहद सजगता से काम कर रही है। इसकी औपचारिकताओं की फाइल सरकार को प्रेषित कर दी गई है। जल्द सरकारीकरण का दर्जा मिल जाएगा। पुलिस थाना के प्रोबेशनर सब इंस्पेक्टर उधम सिंह, मुख्य आरक्षी विजेंद्र सिंह ने गुस्साए प्रशिक्षुओं को समझाया कि शांतिपूर्ण धरना करना उनका अधिकार है। लेकिन उनके उग्र धरना प्रदर्शन से महाविद्यालय का माहौल बिगड़ता है। इसके लिए उन्हें मजबूरन कानूनी कार्रवाई अमल में लानी पड़ेगी। लिहाजा प्रशिक्षु धरना प्रदर्शन के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें।
वहीं, बीफार्मा आयुर्वेद कॉलेज के सरकारीकरण के लिए संघर्षरत दो प्रशिक्षु छात्राएं प्रदर्शन के दौरान बेहोश हो गईं। इन्हें काफी समय बाद होश आया गया। इन्हें कॉलेज परिसर में ही उपचार दिया गया। प्राचार्य डॉ. टेकचंद ठाकुर का कहना है कि बाहरी तत्वों के प्रवेश पर पुलिस थाने में लिखित शिकायत पत्र सौंपकर उचित कार्रवाई की अपील की गई है। जोगिंद्रनगर थाना प्रभारी संदीप शर्मा ने बताया कि बीफार्मा आयुर्वेद कॉलेज में बाहरी छात्रों के प्रवेश कर माहौल तनावपूर्ण करने की शिकायत महाविद्यालय प्रबंधन की ओर से मिली है। प्रशिक्षुओं की सुरक्षा और एहतियात के तौर पर पुलिस जवानों की तैनाती कर दी गई है।
छात्रों को महंगा पड़ सकता है सीएम का काफिला रोकना
मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने पर पांच छात्रों के विरुद्ध दर्ज हुए पुलिस केस की लड़ाई में अन्य छात्र संगठन भी कूदने के लिए तैयार हो गए हैं। घटना के दूसरे दिन वीरवार को एबीवीपी और एसएफआई के कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे गए। इस पर पुलिस का सहारा लेना पड़ा। हालांकि फार्मेसी के छात्रों ने अन्य छात्र संगठनों से किसी भी प्रकार का सहयोग लेने से इंकार कर दिया। वहीं कुछ छात्र अपनी गलती मानने को भी राजी हो गए। पुलिस की ओर से दर्ज किए गए मुकद्दमे का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने की कोशिश पर पांच छात्रों पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमे में दोषी पाए जाने पर छात्रों का भविष्य दांव पर लग सकता है। छात्रों का कहना है कि वह अपने अधिकारों की बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखना चाह रहे थे और लोकतंत्र में यह सब कोई अपराध नहीं है लेकिन पुलिस ने बेवजह उन पर इस प्रकार से मुकदमा बना दिया है। थाना प्रभारी चिंत राम ने बताया कि अभी मामले की जांच चल रही है।
न किसी पर लाठीचार्ज न किसी को लगी चोट: सीएम
बहुतकनीकी कॉलेज में पत्रकारों ने जोगिंद्रनगर फार्मेसी कॉलेज से जुड़े मसले पर सवाल पूछा तो सीएम ने साफ कहा कि यह सब सुनी-सुनाई बातें हैं जिनपर विश्वास नहीं करना चाहिए। बच्चे आए थे, मिले, बहुत प्यार से मिले। जैसे अपने बच्चों को हम समझाते हैं, उस तरह से उन्हें सुना और समझाया। इसमें कुछ टेक्निकल इश्यू थे। बच्चों की पूरी बात सुनी गई।
ऐसी परिस्थिति में कुछ लोगों ने उनको रास्ता रोकने के लिए प्रोवोक करने की कोशिश की थी जोकि आवश्यक नहीं था। उनकी बात सुन ली थी। बल्कि समस्या के पूरे समाधान के लिए पांच-छह लड़कों को अलग से बैठक के लिए बुलाने की भी बात कही थी कि इसका क्या समाधान हो सकता है? लेकिन राजनीतिक मकसद से कुछ लोग बीच में आकर उन्हें शह दे रहे थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। न किसी पर लाठीचार्ज हुआ है, न किसी को चोट लगी है।